Matru Navami 2026: पितृपक्ष में मातृ नवमी को सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहते हैं। जानें मां के अलावा किन महिलाओं श्राद्ध कर सकते हैं और मृत्यु तिथि याद न होने पर क्या करें।
Matru Navami Shradh Rules: पितृपक्ष की नवमी तिथि आज, 4 अक्टूबर को है। ये बेहद खास और भावुक दिन माना जाता है। इसे 'मातृ नवमी' और 'सौभाग्यवती श्राद्ध' भी कहा जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या ये दिन सिर्फ जन्म देने वाली मां के तर्पण के लिए है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस दिन परिवार की उन सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध किया जा सकता है, जिन्होंने परिवार को संवारा और जिनकी मृत्यु अपने पति के जीवित रहते यानी सुहागिन रूप में हुई हो।
मातृ नवमी 2026: आज श्राद्ध का समय कब-कब है?
कुतुप मुहूर्त - दोपहर 12:03 से 12:51 तक (तर्पण और पिंडदान शुरू करने का सबसे उत्तम समय)
रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12:51 से 01:39 तक (धूप-ध्यान और पितरों के नाम अर्पण का समय)
अपराह्न काल- दोपहर 01:39 से शाम 04:01 तक (ब्राह्मण और जरूरतमंदों को भोजन कराने का समय)
मातृ नवमी पर किन-किन महिलाओं का होता है श्राद्ध?
मां: जन्म देने वाली दिवंगत मां का तर्पण इस दिन सबसे प्रमुख होता है।
दादी और परदादी: पिता की मां यानी दादी और उनकी मां का श्राद्ध भी परिवार के कुल की सुख-शांति के लिए इसी दिन किया जाता है।
नानी: मां के मायके यानी ननिहाल की कुलदेवी और नानी का तर्पण दौहित्र (नाती) इस दिन श्रद्धापूर्वक कर सकता है।
सास या परिवार की निसंतान ताई या चाची: अगर परिवार में सास या कोई ऐसी बुजुर्ग महिला रही हों जिनका कोई बेटा न हो और वे सुहागिन संसार से विदा हुई हों, तो बहू या परिजन मातृ नवमी पर उनके नाम का भोजन और तर्पण निकाल सकते हैं।
अगर मृत्यु की तारीख या तिथि याद नहीं हो तो श्राद्ध कैसे करें?
पितृ पक्ष में श्राद्ध के लिए मृत्यु की तिथि का खास महत्व माना जाता है। लेकिन कई बार परिवार में किसी दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु की सही तारीख याद नहीं रहती है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग नियम बताए गए हैं। मातृ नवमी को भी दिवंगत महिलाओं के श्राद्ध से जुड़ी एक खास तिथि माना जाता है। इसलिए अगर आपके परिवार में किसी महिला की मृत्यु की तिथि को लेकर जानकारी नहीं है, तब भी मातृ नवमी के दिन उनका तर्पण करने से उन्हें पूर्ण तृप्ति मिलती है।
मातृ नवमी के दिन क्या करना सबसे शुभ माना जाता है?
खीर और पूड़ी का भोग: मातृ नवमी के दिन सात्विक भोजन बनाएं। इसमें चावल की खीर, पूड़ी और उड़द दाल की कचौड़ी या बड़ा जरूर शामिल करें।
पंचबलि भोग: भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले गाय, कुत्ता, कौवा, देवादि और चींटियों के लिए पांच हिस्से निकालें।
सुहागिन महिला का सत्कार: किसी ब्राह्मणी या सुहागिन महिला को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन कराएं और उन्हें सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और वस्त्र भेंट करें।
जल और तिल से तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हाथ में काले तिल और जल लेकर मातृ पितरों का ध्यान करें और उनसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगें।
डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूरता के लिए है। इसमें दी गई जानकारियां और धार्मिक मान्यताएं पंचांग और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या विधि को अपनाने से पहले अपने कुल पुरोहित, पंडित या संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


