
Hal Shashthi Vart 2026 Kab Hai: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हलषष्ठी का पर्व मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, द्वापर युग में इसी तिथि पर भगवान शेषनाग ने श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के रूप में जन्म लिया था। हलषष्ठी व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। इस दिन गाय के दूध से बनी चीजें जैसे दही, मक्खन, पनीर आदि खाने की मनाही है। आगे जानिए इस बार कब करें हल षष्ठी व्रत, शुभ मुहूर्त व रोचक कथा आदि डिटेल…
पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर, बुधवार की सुबह 06 बजकर 12 मिनिट से शुरू होगी जो 3 सितंबर, गुरुवार की सुबह 04 बजकर 26 मिनिट तक रहेगी। चूंकि षष्ठी तिथि का सूर्योदय 2 सितंबर को होगा, इसलिए इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा।
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- सुबह 07:46 से 09:19 तक
- सुबह 10:53 से दोपहर 12:26 तक
- दोपहर 03:33 से शाम 05:06 तक
- शाम 05:06 से 06:39 तक
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- हल षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें। इस व्रत में अन्न-जल ग्रहण न करने की परंपरा है। अगर निर्जला व्रत रखना संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
- पूजा के लिए बताए गए शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से छठ माता का चित्र बनाएं। सबसे पहले भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा करें। इसके बाद विधि-विधान से छठ माता की पूजा करें।
- पूजा के दौरान छठ माता के भजन और गीत गाएं। इसके बाद उनकी आरती करें। व्रत रखने वाली महिलाओं को हल षष्ठी की कथा जरूर सुननी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा सुने बिना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
- हल षष्ठी के व्रत में गाय के दूध और उससे बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता। इस दिन ऐसी चीजें खाने की परंपरा है, जिन्हें उगाने के लिए हल का इस्तेमाल न किया गया हो। इसमें मोरधन, आलू आदि प्रमुख हैं।
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