Hanuman Jayanti 2026: हनुमानजी के 8 प्रिय भोग, इन्हें चढ़ाने से क्या लाभ होता है? जानें पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से

Published : Apr 02, 2026, 09:45 AM IST
Hanuman Jayanti 2026

सार

Hanuman Ji Ko Kya Pasand Hai: इस बार 2 अप्रैल, गुरुवार को हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन हनुमानजी की विशेष भोग लगाएं जाते हैं। बागेश्वर सरकार यानी पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जानें हनुमानजी को कौन-से 8 भोग अतिप्रिय हैं?

Hanuman Bhog Mantra: हनुमानजी कलयुग के जीवंत देवता हैं। हर साल चैत्र पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 2 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन देश भर के हनुमान मंदिरों में विशेष पूजन आदि किया जाता है और भोग भी लगाया जाता है। हनुमानजी को भोग में कौन-सी 8 चीजें विशेष रूप से प्रिय हैं, इसके बारे में पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने एक वीडियो में बताया है। आगे जानिए कौन-सी हैं ये 8 चीजें…

ये हैं हनुमानजी के 8 प्रिय भोग

1. गुड़-चना- हनुमानजी को गुड़ चना का भोग अति प्रिय है, क्योंकि ये दोनों ही प्राकृतिक हैं। इन्हें चढ़ाने से कुंडली के ग्रहों का दोष मिट जाता है।

2. मीठा पान- हनुमानजी को बिना तंबाकू वाला मीठा पाना चढ़ाने से हर तरह की परेशानी दूर हो जाती है।

3. नारियल- हनुमानजी को पूरा नारियल चढ़ाना चाहिए यानी उसे फोड़ना नहीं चाहिए। इससे आने आने वाले संकटों से बचे रहेंगे।

4. शुद्ध घी की इमरती- पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार हनुमानजी को इमरती का भोग लगाने से आपकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

5. मोतीचूर के लड्‌डू- शुद्ध घी से बने मोतीचूर के लड्‌डू का भोग लगाने से हनुमानजी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

6. केसरिया भात- हनुमानजी को केसर युक्त मीठे चावल का भोग लगाने से मंगल दोष का निवारण होता है।

7. गाय के शुद्ध घी से बना रोट- हनुमानजी को रोट का भोग लगाने से घर के सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

8. पंचमेवा- दाख (किशमिश), मिश्री, काजू, बादाम और मखाने को मिलाकर पंचमेवा तैयार होता है। इसका भोग लगाने से सभी तरह की सिद्धियां हनुमानजी प्रदान करते हैं।

हनुमानजी को भोग लगाने का मंत्र

हनुमान जी को भोग लगाने का एक खास मंत्र हैं-

त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।

गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर॥

ये मंत्र बोलने के बाद हाथ में थोड़ा सा जल लेकर भोग के चारों और घुमाएं और ऊं प्राणाय स्वाहा, ऊं अपानाय स्वाहा, ऊं व्यानाय स्वाहा, ऊं उदानाय स्वाहा, ऊं समानाय स्वाहा बोलकर धरती पर छोड़े दें।

 

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