Mahabharata Interesting Facts: राजा शल्य कौन थे और उनका पांडवों से क्या संबंध था?, पांडवों का साथ देने निकले राजा शल्य कौरवों की ओर कैसे पहुंच गए? कर्ण के सारथी रहते हुए राजा शल्य ने ऐसा क्या किया जिससे कर्ण का मनोबल प्रभावित हुआ?

Who was King Shalya: महाभारत में ऐसे अनेक पात्र हैं जिनके बारे में लोगों कम ही जानकारी है। राजा शल्य भी इन पात्रों में से एक हैं। राजा शल्य कोई और नहीं बल्कि पांडवों के मामा थे लेकिन वचनबद्ध होने के कारण उन्हें कौरवों का साथ देना पड़ा। इतना ही नहीं वे कौरवों के सेनापति भी बने लेकिन युद्ध में मारे गए। वचनबद्ध होने के कारण भले ही उन्होंने कौरवों का साथ दिया हो लेकिन वे पांडवों के बड़े शुभचिंतक थे। आगे जानिए राजा शल्य से जुड़ी रोचक बातें…

ये भी पढ़ें-
कौन थी अर्जुन की चौथी पत्नी, इससे विवाह के लिए कौन-सी शर्त थी?

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

कौन थे पांडवों के राजा शल्य?

महाभारत के अनुसार, राजा पांडु की 2 पत्नियां थीं- कुंती और माद्री। नकुल व सहदेव माद्री की ही संतान थे। शल्य मद्र देश के राजा थे और वे माद्री के भाई थे। इस प्रकार राजा शल्य, नकुल और सहदेव के साथ-साथ सभी पांडवों के मामा कहलाए। राजा शल्य अपने भांजों से बहुत प्रेम करते थे, इसलिए जब उन्हें पता चला कि कौरवों के साथ पांडवों का युद्ध होने वाला है तो भी इस युद्ध में शामिल होने के लिए कुरुक्षेत्र के लिए निकल गए।

ये भी पढ़ें-
Mahabharata Facts: महाभारत का वो कौन-सा श्राप है, जिसके कारण महिलाएं आज भी परेशान हैं?

दुर्योधन को दिया वचन

युद्ध में पांडवों का साथ देने के लिए जब शल्य अपनी सेना के साथ निकले तो रास्ते में अनेक स्थानों पर उनके स्वागत की तैयारियां की गईं थी। राजा शल्य को लगा पांडवों ने उनके स्वागत की व्यवस्था की है। लेकिन ये व्यवस्था दुर्योधन ने की थी। राजा शल्य ने वचन दिया कि जिसने भी उनके स्वागत की व्यवस्था की है वे युद्ध में उसी का साथ देंगे। वचनबद्ध होने के कारण राजा शल्य को दुर्योधन का साथ देने पड़ा।

राजा शल्य बने कौरवों के सेनापति

जब दुर्योधन ने कर्ण को सेनापति बनाया तो उस समय राजा शल्य ने सारथी रहते हुए कर्ण का उत्साह बढ़ाने के बजाय बार-बार उसकी आलोचना की और अर्जुन की प्रशंसा, जिससे कर्ण का मनोबल प्रभावित हुआ। तभी अर्जुन कर्ण का वध करने में सफल रहे। कर्ण के वध के बाद शल्य को कौरव सेना का सेनापति बनाया गया। कौरव सेना के सेनापति रहते हुए युधिष्ठिर के हाथों उनकी मृत्यु हुई।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।