Devshayani Ekadashi Katha: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए बेहद शुभ माना गया है। हर एकादशी का अपना अलग महत्व और कथा है। इनमें देवशयनी एकादशी भी प्रमुख है।
Devshayani Ekadashi Vrat Katha In Hindi: इस बार 25 जुलाई, शनिवार को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। देवशयनी एकादशी से जुड़ी एक पौराणिक कथा राजा मान्धाता और उनके राज्य में पड़े भयंकर अकाल से जुड़ी है। इस कथा को सुने बिना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। आगे पढ़िए देवशयनी एकादशी की पूरी व्रत कथा...
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देवशयनी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन समय में मान्धाता नाम के एक राजा थे। वे अपनी प्रजा का पालन अपनी संतान की तरह करते थे। उनके राज्य में सभी लोग सुखी और समृद्ध थे। एक बार उनके राज्य में भयंकर अकाल पड़ गया। लगातार तीन वर्षों तक बारिश नहीं हुई। खेत सूख गए और प्रजा अन्न के अभाव में परेशान रहने लगी।
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परेशान होकर प्रजा राजा मान्धाता के पास पहुंची और उनसे इस संकट का समाधान करने की प्रार्थना की। राजा ने प्रजा को भरोसा दिलाया कि वह उनकी समस्या का समाधान जरूर करेंगे। इसके बाद राजा कुछ लोगों को साथ लेकर वन की ओर निकल पड़े। घूमते-घूमते राजा मांधाता ब्रह्माजी के मानस पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुंचे। राजा ने ऋषि को प्रणाम कर अपनी पूरी समस्या बताई।
राजा ने कहा, ‘हे महर्षि! मेरे राज्य में तीन वर्षों से वर्षा नहीं हुई है। प्रजा अकाल के कारण बहुत परेशान है। मैं धर्म के अनुसार शासन करता हूं, फिर भी यह संकट क्यों आया, इसका कारण मुझे समझ नहीं आ रहा। कृपया कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरी प्रजा का कष्ट दूर हो सके।’
राजा की बात सुनने के बाद अंगिरा ऋषि ने कहा कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का व्रत करने से इस समस्या का समाधान हो सकता है। ऋषि ने राजा को विधि-विधान से यह व्रत करने की सलाह दी।
राजा मान्धाता अपने राज्य लौट आए और उन्होंने श्रद्धापूर्वक देवशयनी एकादशी का व्रत किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से राज्य में अच्छी वर्षा हुई और प्रजा को अकाल से मुक्ति मिल गई। इसके बाद सभी लोग सुख और समृद्धि के साथ जीवन बिताने लगे।
