
Purnima's Manikya Sthambh in Bihar: भारत को देवताओं का देश कहा जाता है। यहां देवी-देवताओं से जुड़ी ऐसी अनेक प्रमाण देखने को मिलते हैं जिनके बारे में जानकर हर कोई आश्चर्यचकित हो सकता है। ऐसा ही एक स्थान पर बिहार का पूर्णिया का सिकलीगढ़ धरहरा। यहां भगवान नृसिंह का एक प्राचीन मंदिर हैं जहां दूर-दूर से भक्त दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर में एक प्राचीन स्तंभ मौजूद है। मान्यता है कि ये वही स्तंभ है जिसे फोड़कर भगवान नृसिंह प्रकट हुए थे। होली 2026 के मौके पर जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…
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पूर्णिया के नृसिंह मंदिर में जो प्राचीन स्तंभ यान खंभा है, उसे माणिक्य स्तंभ कहा जाता है। लोगों का यही मानना है कि सतयुग में इसी खंभे को फोड़कर भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की था और हिरण्यकशिपु का वध किया था। खास बात है कि इस खंबे में एक प्राकृतिक छिद्र है जिसमें यदि पत्थर या अन्य कोई वस्तु डाली जो काफी देर बाद इसके गिरने की आवाज आती है। इसलिए ऐसा कहते हैं कि माणिक्य स्तंभ की गहराई पाताल लोक तक है।
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इस स्थान की प्राचीनता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा हर साल होली के मौके पर यहां राजकीय उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होकर भगवान नृसिंह की पूजा करते हैं। इस दौरान अनेक सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन भी यहां किए जाते हैं। यहां रंगों के स्थान पर होलिका दहन की राख से होली खेलने की परंपरा है। इस अनोखी परंपरा को देखना भी एक अलग अनुभव है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि सतयुग में यहीं पर राक्षसों के राजा हिरण्यकशिपु की नगरी थी। राजा हिरण्यकशिपु अपने पुत्र प्रहलाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित होकर उसे तरह-तरह की यातनाएं देते था। अंत में हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र को मारने के लिए उसे अपनी बहन होलिका के साथ अग्नि में जलाने का प्रयास किया। लेकिन इस अग्नि से भी प्रह्लाद सुरक्षित बच निकले। इसी खुशी में यहां के लोगों को रंगों से होली खेली। यानी दुनिया की सबसे पहली होली भी यहां खेली गई थी, ऐसी मान्यता है। यहां 40 फीट की होलिका की प्रतिमा बनाकर इसका दहन किया जाता है।
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