Janaki Jayanti Vrat Katha: देवी लक्ष्मी ने क्यों लिया सीता का रूप में जन्म? पढ़ें रोचक कथा

Published : Feb 09, 2026, 09:07 AM IST
Janati Jayanti Vrat Katha

सार

Janaki Jayanti Vrat Katha In Hindi: हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इसे जानकी जयंती भी कहते हैं। इस दिन भगवान श्रीराम की पत्नी देवी सीता की पूजा विशेष रूप से की जाती है।

Sita Ashtami Vrat Katha: धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने दुष्टों का नाश करने के लिए त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। साथ ही देवी लक्ष्मी ने उनकी पत्नी सीता के रूप में। हर साल फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि पर सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाता है, इसे जानकी जयंती भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी तिथि पर देवी सीता का जन्म हुआ था। इस बार ये पर्व 9 फरवरी, सोमवार को है। इस दिन व्रत भी किया जाता है। इस व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब इससे जुड़ी कथा सुनी जाए। आगे जानिए सीता अष्टमी व्रत से जुड़ी रोचक कथा…

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जानकी जयंती व्रत कथा

धर्म ग्रंथों के अनुसार, त्रेतायुग में मिथिला नाम की एक नगरी थी, जिसे जनकपुर भी कहा जाता था। यहां के राजा जनक अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करते थे और उसे अपनी संतान की तरह व्यवहार करते थे। एक बार कईं सालों तक मिथिला में बारिश नहीं हुई जिससे वहां भयंकर अकाल पड़ गया।

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मिथिला के लोग पानी के लिए तरसने लगे। राजा जनक से अपनी प्रजा की ऐसी हालत देखी नहीं गई और उन्होंने सिद्ध ऋषियों से इस परेशानी का हल पूछा। तब ऋषि मुनियों ने अपने तप के बल पर उपाय बताया कि ‘अगर स्वयं राजा जनक खेत में हल चलाएं तो मिथिला में बारिश हो सकती है।’
ऋषि-मुनियों की बात मानकर राजा ने खेत में हल चलाना स्वीकार किया। इसके लिए शुभ मुहूर्त निकाला गया। राजा जनक जब खेत में हल चलाने लगे तो उनका हल एक धातु के बक्से से टकराया। बक्से को खोलकर देखा तो उसमें एक सुंदर कन्या थी। राजा जनक ने उसे अपनी संतान मानकर अपना लिया।
हल की नोक को सीता कहते हैं, इसलिए राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा। राजा जनक की पुत्री होने से वह जानकी भी कहलाई। राजा जनक द्वारा हल जलाने से देवराज इंद्र प्रसन्न हुए और उनके राज्य में जोरदार बारिश हुई जिससे अकाल खत्म हो गया।
इस तरह देवी सीता का जन्म धरती से हुआ था। जानकी जयंती पर जो लोग व्रत करते हैं, उन्हें ये कथा जरूर सुननी चाहिए। तभी इस व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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