- 4 सितंबर, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद जन्माष्टमी व्रत-पूजा का संकल्प लें। संभव हो तो पूरे दिन उपवास रखें, नहीं तो एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें और मन ही मन श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें। घर में किसी साफ स्थान पर पालने में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की स्थापना करें। पालने को अच्छी तरह से सजाएं।
- रात में शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें। सबसे पहले कुमकुम से तिलक करें। फूल चढ़ाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजन सामग्री जैसे- अबीर, गुलाल, इत्र, नारियल, फूल, फल आदि अर्पित करें।
- पूजा करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप मन ही मन में करते करें। लड्डू गोपाल को अपनी इच्छा अनुसार फल, मिठाई, पंचामृत और पंजीरी आदि चीजों का भोग लगाएं।
- भोग में तुलसी के पत्ते जरूर रखें। इसके बाद परिवार सहित भगवान की विधि-विधान से आरती करें।रात को सोएं नहीं, भजन-कीर्तन करते रहें। अगले दिन विधि-विधान से व्रत का पारण करें।
- पारण के बाद सबसे पहले प्रसाद खाएं और फिर भोजन करें। इस तरह जन्माष्टमी का व्रत-पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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