
Baglamukhi Jayanti Kab Hai: देवी पुराणमें 9 देवियों के अलावा 10 महाविद्याओं के बारे में भी बताया गया है। इन्हीं 10 महाविद्याओं में से एक है देवी बगलामुखी। हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को इनका जयंती पर्व मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 24 अप्रैल, शुक्रवार को है। मां बगलामुखी तंत्र-मंत्र की देवी हैं। दुश्मनों का नाश करने और विशेष कामों में सफलता के लिए इनकी पूजा की जाती है। आगे जानिए देवी बगलामुखी की पूजा विधि, मंत्र, आरती आदि…
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सुबह 06:02 से 07:38 तक
सुबह 07:38 से 09:13 तक
दोपहर 11:59 से 12:50 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:25 से 02:00 तक
शाम 05:11 से 06:47 तक
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- 24 अप्रैल, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें। संभव हो तो पूजा के लिए पीले वस्त्र पहनें।
- जिस स्थान पर पूजा करनी हो तो उसे साफ कर लें। वहां एक पटिए पर देवी बगलामुखी की तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले पीले फूलों का हार पहनाएं और हल्दी से तिलक करें।
- शुद्ध घी का दीपक जलाएं। साथ ही पीले चावल भी देवी को अर्पित करें। रोली, अबीर, गुलाल आदि चीजें एक-एक कर देवी को चढ़ाएं, साथ ही पीली चुनरी भी। पीली मिठाई का भोग लगाएं।
- पूजा करते समय ऊं ह्लीं बगलामुख्यै नमः मंत्र का जाप करते रहें। पूजा के बाद देवी की आरती करें। रात में देवी बगलामुखी के मंत्रों का जाप करें। अगले दिन व्रत का पारणा करें।
जय जय श्री बगलामुखी माता, आरती करहुँ तुम्हारी ।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी ॥
कर कमलों में मुदगर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर नारी ।
चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी ॥
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब, भक्ति सदा तव है सुखकारी ।
पालत हरत सृजत तुम जग को, सब जीवन की हो रखवारी ॥
मोह निशा में भ्रमत सकल जन, करहु हृदय महँ, तुम उजियारी ।
तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुम ही हो असुरारी ॥
संतन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी ।
तब चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयकारी ॥
॥ दोहा ॥
बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय
विनती कुलपति मिश्र की, सुख संपत्ति सब होय
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