Sita Navami 2026: क्या आप जानते हैं देवी सीता के पू‌र्व जन्म का रहस्य? 5 रोचक फैक्ट

Published : Apr 25, 2026, 10:38 AM IST
Sita Navami 2026

सार

Sita Navami 2026: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में हर साल सीता नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव 25 अप्रैल, शनिवार को है। मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर देवी सीता भूमि से प्रकट हुई थीं। देवी सीता से जुड़े कईं ऐसे रोचक फैक्ट हैं जो आम लोग नहीं जानते। 

Janaki Jyanti 2026 Kab Hai: वाल्मीकि रामायण के अनुसार देवी सीता का जन्म मां के गर्भ से नहीं हुआ बल्कि वे जमीन के अंदर से बाल रूप में प्रकट हुई थीं। ये घटना वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की बताई जाती है। इसलिए हर साल इस तिथि पर सीता नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 25 अप्रैल, शनिवार को है। सीता देवी लक्ष्मी का अवतार थीं, ये बात तो सभी जानते हैं लेकिन उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें कम ही लोगों को पता है। आगे जानिए देवी सीता से जुड़ी ऐसी ही 5 रोचक बातें…

ये भी पढ़ें-
Budhwa Mangal 2026: क्या है बड़ा मंगल? जानें रोचक कथा, महत्व और डेट्स

क्या है देवी सीता के पू‌र्व जन्म का रहस्य?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार देवी सीता पूर्व जन्म में एक ब्राह्मण पुत्री थीं, उनका नाम वेदवती था। वे भगवान विष्णु की पति रूप में पाना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने घोर तपस्या की। जब वे तपस्या कर रही थी तभी एक दिन रावण ने उन्हें देखा और उन पर मोहित हो गया। रावण वेदवती को अपने साथ लंका ले जाना चाहता था। क्रोधित होकर वेदवती ने रावण को श्राप दिया कि ‘एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी’। इसके बाद वे अग्नि में समा गई। अगले जन्म में सीता के रूप में उन्होंने अपने श्राप को सिद्ध किया।

ये भी पढ़ें-
Badrinath Mandir: बद्रीनाथ मंदिर में क्यों लगाते हैं ‘कॉकरोच’ को भोग, क्या है ये परंपरा?

किस वेद में मिलता है सीता का नाम?

वाल्मीकि रामायण से पहले लिखे गए वेदों में भी सीता नाम की देवी का वर्णन मिलता है। ऋग्वेद में देवी सीता को कृषि की देवी माना है। पृथ्वी से प्रकट होने के कारण ही ऐसा कहा गया है। इस वेद में कृषि के देवताओं की प्रार्थना के लिए लिखे गए सूक्त में वायु, इंद्र आदि के साथ सीता की भी स्तुति की गई है।

देवी सीता ने लंका में क्या खाया?

देवी सीता काफी समय तक लंका में रही, इस दौरान उन्होंने क्या खाया? इसे लेकर भी लोगों के मन में कईं प्रश्न हैं। वाल्मीकि रामायण में इसका जवाब मिलता है। उसमें लिखा है कि जब रावण ने देवी सीता का हरण कर लिया तो उसी रात देवराज इंद्र ने एक दिव्य खीर देवी सीता को खिलाई जिससे उनकी भूख-प्यास शांत हो गई। जिससे वे लंका में बिना कुछ खाए-पिए रहीं।

राजा जनक ने अपनी पुत्री का नाम सीता ही क्यों रखा?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब राजा जनक यज्ञ की पूर्ति के लिए हल चला रहे थे तभी उनका हल किसी धातु की वस्तु से टकराया। राजा जनक ने देखा कि जमीन में एक धातु का मटका है। उसे निकाला तो उसमें उन्हें एक कन्या दिखाई दी। जोती हुई भूमि को तथा हल की नोक को सीता कहते हैं, इसलिए राजा जनक ने उस बालिका का नाम सीता रखा और उसे अपनी पुत्री माना।

देवी सीता को किसने दिए थे दिव्य वस्त्र-आभूषण?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, वनवास के दौरान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण ऋषि अत्रि के आश्रम में पहुंचें। वहां ऋषि अत्रि और उनकी पत्नी अनुसुइया ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया। सती अनुसूइया ने ही देवी सीता को दिव्य वस्त्र और आभूषण दिए जो कभी मलिन यानी मैले नही होते थे। लंका में भी देवी सीता ने यही वस्त्र पहने हुए थे।

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Sita Navmi 2026: कब है सीता नवमी, 25 या 26 अप्रैल? जानें शुभ मुहूर्त-मंत्र सहित पूरी पूजा विधि
Unique Temples: मिर्ची से हवन, तंत्र से सिद्धि! हैरान कर देंगे इस देवी मंदिर के रहस्य