Unique Temples: मिर्ची से हवन, तंत्र से सिद्धि! हैरान कर देंगे इस देवी मंदिर के रहस्य

Published : Apr 24, 2026, 09:27 AM IST
Unique Temples

सार

Baglamukhi Jayanti 2026: हमारे देश में अनेक प्राचीन देवी मंदिर हैं। इन मंदिरों से कोई न कोई खास बात जरूर जुड़ी है। ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी है, जो देवी बगलामुखी को समर्पित है। ये स्थान तंत्र साधना के लिए जाना जाता है।

India's Unique Temples: आपने अब तक अनेक हवनों के बार में देखा और सुना होगा लेकिन क्या मिर्ची से हवन के बारे में सुना है। सुनने में ये बात अजीब लगे लेकिन ये सच है। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नलखेड़ा नामक स्थान पर देवी बगलामुखी का एक प्राचीन मंदिर हैं। यहां विशेष कामों में सफलता के लिए मिर्ची अनुष्ठान किया जाता है। इस अनुष्ठान में हवन में लाल मिर्च डाली जाती है। यहां दूर-दूर से तांत्रिक आकर देवी को प्रसन्न करने के लिए साधनाएं करते हैं। बगलामुखी जयंती (24 अप्रैल 2026) के मौके पर जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…

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क्यों खास है बगलामुखी मंदिर?

धर्म ग्रंथों में देवी की 10 महाविद्याओं का वर्णन भी मिलता है। इनमें से एक हैं बगलामुखी। देवी का ये रूप तंत्र-मंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि देवी बगलामुखी की पूजा से हर तरह का दुख और संकट दूर हो जाता है। इनका एक नाम पीतांबरा भी है। वैसे तो देवी बगलामुखी के अनेक मंदिर हमारे देश में हैं लेकिन इनमें से 2 ही सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं। ये दोनों ही मध्य प्रदेश में है। पहला दतिया में पीतांबरा शक्तिपीठ और दूसरा उज्जैन के नलखेड़ा में स्थित बगलामुखी मंदिर।

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इसलिए तंत्र-मंत्र के लिए है प्रसिद्ध

नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर में देवी बगलामुखी की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। देवी बगलामुखी की प्रतिमा के दाएं ओर मां लक्ष्मी तथा बाईं ओर देवी सरस्वती की प्रतिमा भी हैं। कहा जाता है कि ये प्रतिमा खुद प्रकट हुईं। इस मंदिर के चारों श्मशान है और पास में ही लखूंदर नदी बहती है। श्मशान और नदी का किनारा होने से इस स्थान पर की गई तंत्र साधना बहुत ही जल्दी सिद्ध हो जाती है। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दूर से तांत्रिक साधना करने आते हैं।

सिर्फ यहीं होता है मिर्ची अनुष्ठान

हवन में आमतौर पर समिधा का उपयोग किया जाता है लेकिन बगलामुखी मंदिर में विशेष कार्य की सिद्धि के लिए मिर्ची अनुष्ठान यानी मिर्ची यज्ञ करने की परंपरा है। ये अनुष्ठान शत्रुओं पर विजय पाने के लिए किया जाता है। इस अनुष्ठान में साबूत लाल मिर्ची के साथ चंदन, गूगल, सरसों के तेल का उपयोग भी किया जाता है। संभवत ये देश का पहला ऐसा मंदिर हैं जहां मिर्ची से यज्ञ किया जाता है।


 

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