
Kajari Teej Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। इसे बड़ी तीज, कजली तीज, सातुड़ी तीज आदि नामों से भी जाता है। इस पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कुछ स्थानों पर इस दिन नीम के पेड़ की पूजा भी की जाती है और नवविवाहित महिलाओं के मायके से पूजा के लिए विशेष सामग्री भी आती है। जानें इस बार कब है कजरी तीज और कब करें रतजगा…
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त, रविवार की सुबह 09 बजकर 37 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 31 अगस्त, सोमवार की सुबह 08 बजकर 51 मिनिट तक रहेगी। चूंकि तृतीया तिथि का सूर्योदय 31 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन ये पर्व मनाया जाएगा। इस दिन ग्रहों की स्थिति से कईं शुभ योग बनेंगे जिससे इस दिन का महत्व और भी अधिक माना जाएगा।
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परंपरा के अनुसार कजरी तीज के एक दिन पहले महिलाएं रात भर जागकर भगवान शिव और देवी पार्वती के भजन करती हैं। व्रत करने वाली महिलाएं पूरी रात जागती हैं, सोती बिल्कुल नहीं है, इसे रतजगा कहते हैं। चूंकि कजरी तीज 31 अगस्त को है तो इसके दिन पहले यानी 30 अगस्त, रविवार की रात को कजरी तीज का रतजगा किया जाएगा।
कजरी तीज का पर्व महिला प्रधान हैं। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती है वहीं कुंवारी लड़कियां मनपसंद जीवन साथी पाने की कामना से शिवजी और देवी पार्वती की पूजा विशेष रूप से करती हैं। कजरी तीज को बूढ़ी तीज, सतवा तीज आदि नामों से भी जाना जाता है। कुंवारी लड़कियों को इस पर्व का विशेष रूप से इंतजार रहता है। धर्म ग्रंथों में भी इस पर्व का विशेष महत्व बताया गया है।
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