Guru Purnima Significance: हर साला आषाढ़ मास के अंतिम दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने गुरुओं की पूजा करते हैं। इस पर्व का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में लिखा है।
Why Is Guru Purnima Celebrated: हिंदू कैलेंडर का चौथा महीना है आषाढ़। इस महीने की पूर्णिमा पर हर साल गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने शिक्षक, आध्यात्मिक और धार्मिक गुरु की पूजा करते हैं। धर्म ग्रंथों में भी इस पर्व का विशेष महत्व बताया गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व द्वापर युग यानी महाभारत काल से मनाया जा रहा है। ये पर्व क्यों मनाते हैं इसके पीछे का कारण भी महाभारत काल से ही जुड़ा है। आगे जानिए इस बार गुरु पूर्णिमा कब है और क्यों मनाते हैं ये पर्व…
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कब है गुरु पूर्णिमा 2026?
इस बार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई, बुधवार को है, इसलिए इसी दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन प्रीति, आयुष्मान, और छत्र नाम के 3 शुभ योग बनेंगे जिससे इस पर्व का महत्व और भी अधिक बढ़ जाएगा। ग्रहों की स्थिति से और भी कईं शुभ योग इस दिन बनेंगे।
धर्म ग्रंथों के अनुसार द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यास के रूप में अवतार लिया था। वेदों का विभाजन करने के कारण इन्हें वेदव्यास भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने ही महाभारत ग्रंथ लिखा है। महर्षि वेदव्यास पांडव और कौरवों सभी के गुरु भी थे। इनका जन्म आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर हुआ था। महर्षि वेदव्यास की जन्मतिथि होने से हर साल आषाढ़ पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। ये परंपरा महाभारत काल से चली आ रही है।
हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि गुरु के ज्ञान से ही आप भगवान की प्राप्ति कर सकते हो। गुरु पूर्णिमा पर्व ही हमें गुरु के महत्व के बारे में बताता है। अगर आप किसी भी क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको उस क्षेत्र के विद्वान से ज्ञान प्राप्त करना पड़ेगा, तभी आपको सफलता मिल सकती है। यही विद्वान हमारे गुरु होते हैं। यानी सफलता के लिए गुरु से ज्ञान पाना जरूरी है। इसी बात से गुरु के महत्व का पता चलता है।
Disclaimer इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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