Maghi Purnima Katha: कैसे एक निर्धन बना धनवान? पढ़ें माघी पूर्णिमा की ये रोचक कथा

Published : Feb 01, 2026, 06:00 AM IST
Maghi Purnima Katha

सार

Maghi Purnima Katha: धर्म ग्रंथों में माघी पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर जरूरतमंदों को दान देना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इस पूर्णिमा से जुड़ी एक रोचक कथा भी है।

Maghi Purnima Katha In Hindi: हिंदू पंचांग के 11वें महीने का नाम माघ है। इस महीने की पूर्णिमा बहुत खास मानी गई है। इसे माघी पूर्णिमा कहते हैं। इस बार माघी पूर्णिमा का पर्व 1 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। माघी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस पूर्णिमा से जुड़ी एक रोचक कथा भी है। जो भी व्यक्ति माघी पूर्णिमा का व्रत करता है, उसे ये कथा जरूर सुननी चाहिए, तभी उसे इस व्रत का पूरा फल प्राप्त होगा। आगे जानिए माघी पूर्णिमा से जुड़ी रोचक कथा…

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माघी पूर्णिमा की रोचक कथा

प्रचलित कथा के अनुसार एक बार देवर्षि नारद भगवान विष्णु के पास गए और उनसे पूछा कि ’कलियुग में ऐसा कौन-सा व्रत है, जिसे करने से मनुष्य अपने सभी कष्टों से मुक्त होकर पुण्य लाभ लेकर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।’

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देवर्षि नारद की बात सुनकर भगवान विष्णु ने कहा ‘जो व्यक्ति माघ मास की पूर्णिमा का व्रत नियम पूर्वक करता है, भगवान सत्यनारायण की कथा सुनता है, चंद्रमा को अर्घ्य देता और और ब्राह्मणों को दान देता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं।’
इसके बाद भगवान विष्णु ने माघी पूर्णिमा की कथा भी देवर्षि नारद को सुनाई। उसके अनुसार, प्राचीन समय में विदिशा नाम की नगरी में धर्मदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह बहुत ही गरीब था लेकिन भगवान का परम भक्त था। एक दिन भगवान विष्णु ने उसे दर्शन देकर पूर्णिमा व्रत करने को कहा।
धर्म दत्त ने विधि-विधान से सभी पूर्णिमा व्रत किए। माघ मास की पूर्णिमा पर उसने अपने व्रत का उद्यापन किया। ऐसा करने से उसके जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगे। देखते ही देखते वह कुछ ही समय में धनवान बन गया। उसे योग्य संतान भी हुई। इस तरह उसने सभी भौतिक सुख प्राप्त किए।
इस तरह सुखी जीवन जीते हुए जब उसकी मृत्यु हुई तो पूर्णिमा व्रत के पुण्यफल से उसे विष्णुलोक की प्राप्ति हुयी। इसलिए पूर्णिमा का व्रत बहुत ही शुभ फल देने वाला माना गया है। जो भी व्यक्ति माघी पूर्णिमा पर इस कथा को सुनता है, उसे अपने जीवन में हर तरह का सुख प्राप्त होता है।



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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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