
vishwakarma jayanti kab hai: हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इसे विश्वकर्मा जयंती कहते हैं। इस बार ये पर्व 31 जनवरी, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन औजारों का काम करने वाले बढ़ाई अपने ईष्टदेव भगवान विश्वकर्मा की पूजा विशेष रूप से करते हैं। पूजा के बाद भगवान विश्वकर्मा की आरती भी की जाती है। भगवान विश्वकर्मा की आरती कैसे करें? आगे जानिए पूजा विधि और लिरिक्स हिंदी में…
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सबसे पहले भगवान विश्वकर्मा के चित्र की विधिवित पूजा करें और इसके बाद आरती करें। आरती की थाली 4 बार चरणों से, 2 बार नाभि से, 1 बार चेहरे से और 7 बार पूरे शरीर पर घूमाकर आरती करें। इस तरह 14 बार आरती की थाली घूमानी चाहिए। शास्त्रों में आरती की यही विधि बताई गई है।
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जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि मे विधि को, श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगीरा तप से, शांति नहीं पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःखा कीना ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दंपति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत सगरी हरी ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप साजे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे तब पद का, सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा की आरती, जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी, सुख संपति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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