Vishwakarma Jayanti 2026: हर साल माघ मास में विश्वकर्मा जयंती का पर्व मनाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पकार यानी आर्किटेक्ट हैं। मान्यता है कि ब्रह्माजी के कहने पर पूरी सृष्टि की रचना भगवान विश्वकर्मा ने ही की है।
Kab Hai Vishwakarma Jayanti 2026: भगवान विश्वकर्मा का वर्णन रामायण और महाभारत जैसे अनेक ग्रंथों में मिलता है। भगवान विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पी हैं, इसलिए इन्हें देवशिल्पी भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने अनेक दिव्य महलों का निर्माण किया है जिनमें सोने की लंका और भगवान श्रीकृष्ण की द्वारिका नगरी प्रसिद्ध है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को विश्वकर्मा जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 30 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। आगे जानें विश्वकर्मा पूजा के शुभ मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…
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विश्वकर्मा पूजा 2026 के शुभ मुहूर्त
सुबह 07:11 से 08:33 तक
सुबह 08:33 से 09:55 तक
दोपहर 12:18 से 01:01 तक
दोपहर 12:40 से 02:02 तक
शाम 04:46 से 06:08 तक
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इस विधि से करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा
30 जनवरी, शुक्रवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। जिस स्थान पर पूजा करनी है तो उसे साफ कर लें। शुभ मुहूर्त में इस स्थान पर लकड़ी के बाजोट पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। सबसे पहले चित्र पर तिलक लगाएं, शुद्ध घी का दीपक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं। अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करें। इच्छा अनुसार भोग लगाएं। अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।
भगवान विश्वकर्मा की आरती लिरिक्स हिंदी में
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि मे विधि को,
श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःखा कीना ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी,
सुख संपति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
