Sant Ravidas Jayanti 2026: संत रविदास हमारे देश के महान संतों में से एक थे जिन्होंने समाज में फैली बुराइयों और कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। हर साल माघी पूर्णिमा पर उनकी जयंती बहुत ही श्रद्धा से मनाई जाती है।

Kab Hai Sant Ravidas Jayanti 2026: भारत को संतों की भूमि कहा जाता है। यहां ऐसे अनेक संत हुए जिन्होंने समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। ऐसे ही एक संत थे रविदास। उन्होंने समाज में फैली गलत धारणाओं का खुलकर विरोध किया और लोगों को सोचने-समझने के लिए एक नई विचारधारा की शुरूआत की। जानें साल 2026 में कब है संत रविदास जयंती और इनसे जुड़ी रोचक बातें…

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कब है संत रविदास जयंती 2026?

मान्यता है कि संत रविदास का जन्म संवत 1337 को माघ मास की पूर्णिमा पर हुआ था। इससे संबंधित एक दोहा भी प्रचलित है-
चौदह सौ तैंतीस कि माघ सुदी पन्दरास।
दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री गुरु रविदास जी।

इस बार माघ मास की पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी, रविवार को है। इसलिए इसी दिन संत रविदास की जयंती मनाई जाएगी।

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संत रविदास के परिवार में कौन-कौन था?

संत रविदास के पिता का नाम संतोख दास और माता का कलसा देवी था। उनकी पत्नी का नाम लोना देवी था। संत रविदास जूते बनाने का काम करते थे, इसलिए उस समय उन्हें बहुत ही हीन दृष्टि से देखा जाता था। समाज की इसी ऊंच-नीच की बुराई को दूर करने के लिए संत रविदास ने अथक प्रयास किए। बाद में जब संत रविदास के विचारों को लोगों ने समझा तो उन्हें संत की उपाधि दी गई। कुछ लोग उन्हें संत शिरोमणि भी कहते हैं।

साधु-संतों की सेवा करना था पसंद

संत रविदास जी बहुत ही परोपकारी और दयालु थे। साधु-संतों और जरूरतमंदों की सहायता करना उनका स्वभाव। अपने इसी स्वभाव के कारण वे कईं बार बिना पैसे लिए ही लोगों को जूते बनाकर भेंट कर देते थे। उन्हें लाभ हानि की चिंता बिल्कुल नहीं था। वे हमेशा कहते- मन चंगा तो कटौती में गंगा। यानी अगर आपका मन शुद्ध है तो साधारण जल से स्नान करने से भी आपको गंगा स्नान का फल मिल सकता है।

काशी में है संत रविदास का गोल्डन टेंपल

काशी में संत रविदास का एक भव्य मंदिर है, जिसे देश का दूसरा गोल्डन टेंपल भी कहा जाता है। इस मंदिर में 200 किलो सोने से ज्यादा की अलग-अलग चीजें हैं जैसे पालकी, दीपक आदि। संत रविदास के लिखे लगभग 40 पद गुरु ग्रंथ साहिब में भी मिलते हैं, जिनका संपादन गुरु अर्जुनदेव साहिब ने 16वां सदी में किया था। इसी बात से उनकी महानता और दूरदृष्टि का पता चलता है।


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