Mahabharat Facts: कौन थीं धृतराष्ट्र की वो इकलौती बेटी, जिसके पति को अर्जुन दी थी दर्दनाक मौत?

Published : May 19, 2026, 03:37 PM IST
Mahabharat Facts Dushala

सार

Mahabharat Interesting Facts: धृतराष्ट्र और गांधारी के दुर्योधन सहित 100 पुत्र थे ये बात तो सभी जानते हैं लेकिन उनकी एक पुत्री भी थी, ये बात कम ही लोगों को पता है। धृतराष्ट्र की इस पुत्री के बारे में ज्यादा जानकारी किसी ग्रंथ में नहीं है।

Who was Dushala? महाभारत में कौरवों और पांडवों की कहानी के बारे में लगभग हर कोई जानता है। दुर्योधन, दु:शासन, भीष्म, अर्जुन और श्रीकृष्ण जैसे पात्रों का जिक्र अक्सर होता है, लेकिन इसी महागाथा में एक ऐसा किरदार भी था जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये पात्र था दुर्योधन की बहन दु:शला। कहा जाता है कि दु:शला कौरवों की इकलौती बहन थी और अपने भाइयों की बेहद लाडली भी थी। पांडव भी उसे बहन की तरह ही प्यार करते थे। आगे जानिए दु:शला से जुड़े रोचक तथ्य…

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100 पुत्रों के साथ जन्मी एक पुत्री

महाभारत के अनुसार, गांधारी को महर्षि वेदव्यास से 100 पुत्रों का वरदान मिला था। समय आने पर गांधारी को गर्भ ठहरा, लेकिन गांधारी के गर्भ से संतान नहीं बल्कि एक कठोर मांसपिंड निकला। गांधारी उसे फेंकना चाहती थी लेकिन तभी महर्षि वेदव्यास वहां आए गए और उन्होंने उस मांसपिंड को 101 भागों में बांटकर अलग-अलग पात्रों में सुरक्षित रखने को कहा। समय पूरा होने पर उन्हीं पात्रों में से 100 पुत्र और 1 पुत्री का जन्म हुआ। यही पुत्री आगे चलकर दु:शला कहलायी।

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पांडवों से भी था बहन जैसा रिश्ता

दु:शला सिर्फ कौरवों की बहन ही नहीं थी, बल्कि पांडव भी उसे काफी स्नेह देते थे। पांडव उसे अपनी छोटी बहन की तरह मानते थे। यही वजह थी कि कई मौकों पर उसके सम्मान का विशेष ध्यान रखा गया। जब पांडव वनवास में थे, तब दु:शला के पति जयद्रथ ने द्रौपदी के हरण का प्रयास किया। उस दिन पांडवों ने उसे पकड़ लिया लेकिन बहन का पति होने के कारण उसे जीवनदान दे दिया।

अर्जुन के हाथों हुई जयद्रथ की मृत्यु

महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के वध का मुख्य कारण दु:शला का पति जयद्रथ ही था। अर्जुन ने उसे सूर्यास्त से पहले मारने का प्रण किया। अर्जुन की सहायता के लिए श्रीकृष्ण ने दिन में ही कुछ देर के लिए अंधेरा कर दिया। जयद्रथ को लगा कि सूर्यास्त हो गया, ये देख वह अर्जुन के सामने आ गया। इसका फायदा उठाकर अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया।

युद्धभूमि में अर्जुन के सामने पहुंची दु:शला

महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ किया। यज्ञ के घोड़े का रक्षक अर्जुन को बनाया गया। घोड़े की रक्षा करते हुए अर्जुन जब सिंधु देश पहुंचे तो ये खबर सुनकर ही दु:शला के पुत्र की मृत्यु हो गई। तब दु:शला अपने पोते को लेकर युद्धभूमि में पहुंची और अर्जुन से सिंधु देश पर आक्रमण ने करने की प्रार्थना की। अर्जुन ने दु:शला को बहन की तरह स्नेह दिया और सिंधु देश छोड़कर चले गए।

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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