
Vedic Gods: हिंदू धर्म में भगवान शिव, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और हनुमान जी जैसे देवी-देवताओं के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन वैदिक काल में कई ऐसे देवता भी पूजे जाते थे जिनका नाम आज बहुत कम लोग जानते हैं। इन्हीं में से एक हैं पूषा, जिन्हें मार्गदर्शन, सुरक्षा और समृद्धि का देवता माना जाता है। विवाह आदि विशेष मौकों पर पूषा देव की पूजा की जाती है। आगे जानिए पूषा देव से जुड़े रोचक तथ्य…
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पूषा देव का सबसे पहला वर्णन ऋग्वेद में मिलता है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार ये यात्रियों के रक्षक माने जाते थे। ऐसा विश्वास था कि जो लोग लंबी यात्रा पर निकलते थे, वे सुरक्षित सफर के लिए पूषा देव की पूजा करते थे। ऐसी मान्यता भी है कि पूषा देव ही भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाते हैं और यात्रा के दौरान आने वाली बाधाओं से रक्षा करते हैं।
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वैदिक विवाह मंत्रों में भी पूषा का उल्लेख मिलता है। मान्यता थी कि वे दुल्हन को सुरक्षित रूप से उसके नए घर तक पहुंचाने में मदद करते हैं। मान्यता यह भी है कि खोई हुई वस्तु या पशु को ढूंढने के लिए भी पूषा देव से प्रार्थना की जाती थी।
पूषा को पशुओं का संरक्षक भी माना गया है। प्राचीन समय में जब लोगों की आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर थी, तब लोग अपने पशुधन की सुरक्षा के लिए उनकी पूजा करते थे। दूसरे देवताओं के विपरीत पूषा का रथ घोड़ों नहीं बल्कि बकरियों द्वारा खींचा जाता था। यह उनकी सबसे अनोखी पहचान मानी जाती है।
शिव पुराण की कथा के अनुसार जब भगवान शिव के क्रोध से वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ को नष्ट किया, तब पूषा भी वहीं थे। शिवजी का अपमान होते देख पूषा हंस रहे थे इसलिए वीरभद्र ने उनके दांत तोड़ दिए। इसी कारण वे वे केवल नरम भोजन ही ग्रहण करते हैं। आज भले ही पूषा का नाम कम लिया जाता हो, लेकिन वैदिक परंपरा में उनका महत्व काफी खास माना गया है।
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