Adhik Maas 2026 Upay: सनातन धर्म में अधिक मास को बेहद पवित्र माना गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने पूजा-पाठ, व्रत, जप और दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। 

Adhik Maas Mai Kya Daan Kare: ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अधिक मास में दान का विशेष महत्व है। इस महीने में दान करने से कईं गुना फल प्राप्त होता है। इस महीने में रोज तिथि के अनुसार अलग-अलग चीजों का दान करना चाहिए। तिथि के अनुसार दान किया जाए तो उसका प्रभाव और शुभ फल बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि अधिक मास में किस तिथि पर कौन-सी वस्तु का दान करना शुभ माना गया है…

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प्रतिपदा तिथि
अधिक मास की प्रतिपदा तिथि पर घी, गेहूं और अनाज का दान शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां कम होती हैं।

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द्वितीया तिथि
इस दिन दूध, दही, चीनी और सफेद वस्त्र दान करना अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे परिवार में शांति और मधुरता बढ़ती है।

तृतीया तिथि
तृतीया तिथि पर सुहाग सामग्री, फल और गुड़ का दान किया जाता है। इसे वैवाहिक सुख और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।

चतुर्थी तिथि
भगवान गणेश को समर्पित इस तिथि पर तिल, लड्डू और दूर्वा का दान शुभ माना गया है। इससे जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

पंचमी तिथि
पंचमी के दिन हरी सब्जियां, मूंग दाल और हरे रंग की वस्तुओं का दान करना लाभकारी माना जाता है। इसे स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।

षष्ठी तिथि
इस तिथि पर शहद, पीले फल और हल्दी का दान शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे संतान और परिवार से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं।

सप्तमी तिथि
सूर्य देव से जुड़ी सप्तमी तिथि पर गुड़, गेहूं और तांबे के पात्र का दान करना अच्छा माना जाता है। इससे मान-सम्मान और ऊर्जा में वृद्धि होती है।

अष्टमी तिथि
अष्टमी के दिन लाल वस्त्र, नारियल और मिठाई का दान शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है।

नवमी तिथि
इस दिन कन्याओं को भोजन कराने और अन्न दान का विशेष महत्व बताया गया है। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

दशमी तिथि
दशमी तिथि पर जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल, छाता या जल से जुड़ी वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है। इसे सेवा और पुण्य से जोड़कर देखा जाता है।

एकादशी तिथि
भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी पर चावल, केले और पीले वस्त्र का दान विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन व्रत और भक्ति का भी खास महत्व रहता है।

द्वादशी तिथि
द्वादशी तिथि पर दही, चावल और तुलसी का दान शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है।

त्रयोदशी तिथि
इस दिन दीपक, तेल और काले तिल का दान करने की परंपरा है। इसे शनि दोष और नकारात्मक प्रभाव कम करने वाला माना जाता है।

चतुर्दशी तिथि
चतुर्दशी पर कंबल, भोजन और सरसों के तेल का दान शुभ माना गया है। इससे पितरों का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।

पूर्णिमा और अमावस्या तिथि
अधिक मास की पूर्णिमा या अमावस्या पर अन्न, वस्त्र, जल और दक्षिणा का दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना बेहद पुण्यदायी माना जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।