Mahavir Chalisa Lyrics: महावीर जयंती 2026 कब है? जानें सही डेट, महत्व और महावीर चालीसा हिंदी में

Published : Mar 30, 2026, 09:12 AM IST
Mahavir Chalisa Lyrics

सार

Mahavir Jayanti 2026 Date: इस बार महावीर जयंती का पर्व 31 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन अगर महावीर चालीसा का पाठ किया जाए तो मन को शांति का अनुभव होता है और टेंशन दूर होती है। 

Kab Hai Mahavir Jayanti: हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पूरे देश में महावीर जयंती का पर्व बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भगवान महावीर जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर थे, इन्होंने ही दुनिया को जीओ और जीने दो का संदेश दिया। उनकी बताई हुई शिक्षा आज के समय में भी हमें सच्चाई का रास्ता बताती हैं। जैन मान्यताओं के अनुसार महावीर जयंती पर महावीर चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलती है और टेंशन दूर होती है। आगे जानिए महावीर चालीसा के लिरिक्स हिंदी में…

ये भी पढ़ें-
April 2026 Hindu Calendar: अप्रैल में कब, कौन-सा त्योहार? नोट करें हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया की डेट

Panchmukhi Rudraksha Benefits: इन 2 राशियों के लिए है वरदान पांच मुखी रुद्राक्ष!

महावीर चालीसा लिरिक्स हिंदी में

शीश नवा अरिहन्त को, सिद्धन करूं प्रणाम।
उपाध्याय आचार्य का, ले सुखकारी नाम।
सर्व साधु और सरस्वती, जिन मन्दिर सुखकार।
महावीर भगवान को, मन-मन्दिर में धार।
जय महावीर दयालु स्वामी, वीर प्रभु तुम जग में नामी।
वर्धमान है नाम तुम्हारा, लगे हृदय को प्यारा प्यारा।
शांति छवि और मोहनी मूरत, शान हँसीली सोहनी सूरत।
तुमने वेश दिगम्बर धारा, कर्म-शत्रु भी तुम से हारा।
क्रोध मान अरु लोभ भगाया, महा-मोह तुमसे डर खाया
तू सर्वज्ञ सर्व का ज्ञाता, तुझको दुनिया से क्या नाता।
तुझमें नहीं राग और द्वेष, वीर रण राग तू हितोपदेश।
तेरा नाम जगत में सच्चा, जिसको जाने बच्चा बच्चा।
भूत प्रेत तुम से भय खावें, व्यन्तर राक्षस सब भग जावें।
महा व्याध मारी न सतावे, महा विकराल काल डर खावे।
काला नाग होय फन धारी, या हो शेर भयंकर भारी।
ना हो कोई बचाने वाला, स्वामी तुम्हीं करो प्रतिपाला।
अग्नि दावानल सुलग रही हो, तेज हवा से भड़क रही हो।
नाम तुम्हारा सब दुख खोवे, आग एकदम ठण्डी होवे।
हिंसामय था भारत सारा, तब तुमने कीना निस्तारा।
जनम लिया कुण्डलपुर नगरी, हुई सुखी तब प्रजा सगरी।
सिद्धारथ जी पिता तुम्हारे, त्रिशला के आँखों के तारे।
छोड़ सभी झंझट संसारी, स्वामी हुए बाल-ब्रह्मचारी।
पंचम काल महा-दुखदाई, चाँदनपुर महिमा दिखलाई।
टीले में अतिशय दिखलाया, एक गाय का दूध गिराया।
सोच हुआ मन में ग्वाले के, पहुँचा एक फावड़ा लेके।
सारा टीला खोद बगाया, तब तुमने दर्शन दिखलाया।
जोधराज को दुख ने घेरा, उसने नाम जपा जब तेरा।
ठंडा हुआ तोप का गोला, तब सब ने जयकारा बोला।
मंत्री ने मन्दिर बनवाया, राजा ने भी द्रव्य लगाया
बड़ी धर्मशाला बनवाई, तुमको लाने को ठहराई।
तुमने तोड़ी बीसों गाड़ी, पहिया खसका नहीं अगाड़ी।
ग्वाले ने जो हाथ लगाया, फिर तो रथ चलता ही पाया।
पहिले दिन बैशाख बदी के, रथ जाता है तीर नदी के।
मीना गूजर सब ही आते, नाच-कूद सब चित उमगाते।
स्वामी तुमने प्रेम निभाया, ग्वाले का बहु मान बढ़ाया।
हाथ लगे ग्वाले का जब ही, स्वामी रथ चलता है तब ही।
मेरी है टूटी सी नैया, तुम बिन कोई नहीं खिवैया।
मुझ पर स्वामी जरा कृपा कर, मैं हूँ प्रभु तुम्हारा चाकर।
तुम से मैं अरु कछु नहीं चाहूँ, जन्म-जन्म तेरे दर्शन पाऊँ।
चालीसे को चन्द्र बनावे, बीर प्रभु को शीश नवावे।

सोरठा
नित चालीसहि बार, बाठ करे चालीस दिन।
खेय सुगन्ध अपार, वर्धमान के सामने।।
होय कुबेर समान, जन्म दरिद्री होय जो।
जिसके नहिं संतान, नाम वंश जग में चले।।

 

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Pradosh Vrat March 2026: 30 या 31 मार्च, कब करें प्रदोष व्रत? जानें डेट, पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त
Mahavir Jayanti 2026 Date: 30 या 31 मार्च, कब है महावीर जयंती? नोट कीजिए सही डेट