Kamada Ekadashi Vrat Katha: इस कथा को सुने बिना नहीं मिलेगा कामदा एकादशी व्रत का पूरा फल

Published : Mar 29, 2026, 07:16 AM IST
Kamada Ekadashi Vrat Katha

सार

Kamada Ekadashi Story: इस बार कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च, रविवार को किया जाएगा। इस व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। कामदा एकादशी से जुड़ी एक कथा भी है जो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई थी। 

Kamada Ekadashi Vrat Katha In Hindi: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। इस बार ये व्रत 29 मार्च, रविवार को किया जाएगा। इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है और तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। बड़ी से बड़ी समस्या भी इस एकादशी व्रत से दूर हो जाती है। इस एकादशी से जुड़ी एक कथा भी है जिसे सुनने से ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। ये कथा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई थी। आगे पढ़ें कामदा एकादशी व्रत की ये रोचक कथा…

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कामदा एकादशी व्रत की कथा

प्राचीन समय में भागीपुर नामक एक नगर था, उसके राजा पुण्डरीक थे। उसी नगर में ललित एवं ललिता नाम के 2 गंधर्व स्त्री-पुरुष रहते थे जो गायन में बहुत ही प्रवीण थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। एक बार राजा पुण्डरीक की सभा में गंधर्व ललित गायन कर रहा था। तभी उसे अपनी प्रियतमा ललिता की याद आ गई जिससे विचलित होकर पर अशुद्ध गायन करने लगा।

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ऐसा होते देख राजा पुण्डरीक को भयंकर क्रोध आया और उसने ललित को श्राप दे दिया ‘तू नरभक्षी दैत्य बनकर अपने कर्म का फल भोगेगा।’ गंधर्व ललित उसी समय एक दैत्य बन गया और तरह-तरह के दुःख भोगने लगा। अपने प्रियतम का ऐसा हाल देख ललिता को बहुत दुख हुआ। वह अपने पति के उद्धार के लिए तरह-तरह के विचार करने लगी। इधर राक्षस बना ललित अनेक तरह के पाप करने लगा।
एक बार ललिता अपने पति का पीछा करते हुए विन्ध्याचल पर्वत पहुंच गई, वहां उसने श्रृंगी मुनि का आश्रम देखा। ललिता ने श्रृंगी मुनि को अपनी पूरी व्यथा सुनाई और इस संकट से मुक्ति के लिए उपाय पूछा। तब श्रृंगी मुनि ने कहा ‘तुम चैत्र मास का कामदा एकादशी का व्रत करो, इससे तुम्हारी परेशानी दूर हो सकती है। ऋषि के कहने पर ललिता ने कामदा एकादशी का व्रत किया।
ललिता ने इस व्रत का पुण्य फल अपने पति ललित को दे दिया, जिससे उसे इस राक्षस योनि से मुक्ति मिल गई और वह पुन: पहले की तरह सुंदर हो गया। मृत्यु के पश्चात् ललित और ललिता दोनों पुष्पक विमान पर बैठकर विष्णुलोक को चले गये। इस तरह इस व्रत के प्रभाव से दोनों को मोक्ष की प्राप्ति हो गई।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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