Makar Sankranti 2026 Muhurat: दोपहर बाद शुरू होगा मकर संक्रांति का मुहूर्त, यहां नोट करें टाइम

Published : Jan 10, 2026, 10:46 AM IST

Makar Sankranti 2026 Shubh Muhurat: हर साल की तरह इस साल भी मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी, बुधवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त दोपहर बाद शुरू होगा। जानें क्या है मुहूर्त का सही समय।

PREV
15
मकर संक्रांति 2026 के शुभ मुहूर्त

Makar Sankranti 2026 Kab Hai: जब सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। हर बार की तरह भी इस बार ये पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। खास बात ये है कि इस बार मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त दोपहर बाद शुरू होगा। यानी मकर संक्रांति का स्नान-दान दोपहर बाद किया जाएगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानिए मकर संक्रांति पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा…


ये भी पढ़ें-
Makar Sankranti 2026: एक साल में कितनी संक्रांति होती है?

25
सूर्य कब करेगा मकर राशि में प्रवेश?

ज्योतिषाचार्य पं. द्विवेदी के अनुसार इस बार सूर्य 14 जनवरी की दोपहर लगभग 3 बजकर 13 मिनिट पर धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसलिए इसके बाद ही मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त शुरू होगी। मकर संक्रांति से संबंधित स्नान और दान भी दोपहर बाद ही करना श्रेष्ठ रहेगा।


ये भी पढ़ें-
Makar Sankranti Upay: मकर संक्रांति पर करें 5 मंत्रों का जाप, सूर्य की तरह चमकेगी किस्मत

35
मकर संक्रांति 2026 शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति पर पुण्य काल 14 जनवरी, बुधवार की दोपहर 03 बजकर 13 मिनिट से शुरू होगा जो शाम 05 बजकर 45 मिनिट तक रहेगा। यानी दान-पुण्य के लिए लोगों को पूरे 02 घण्टे 32 मिनट का समय मिलेगा। अगर महा पुण्य काल की बात की जाए तो ये दोपहर 03:13 से शाम 04:58 तक रहेगा यानी 01 घण्टा 45 मिनट।

45
मकर संक्रांति 2026 शुभ योग

14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर कईं शुभ योग भी बनेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन वृद्धि, सौम्य, अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि नाम का शुभ योग रहेंगे। इनके अलावा मकर राशि में शुक्र और सूर्य के साथ होने से शुक्रादित्य नाम का राजयोग योग भी बनेगा। इन शुभ योगों में किया गया स्नान-दान बहुत खास रहेगा।

55
क्या है मकर संक्रांति का महत्व?

सूर्य जब धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है तो सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध से निकलकर उत्तरी गोलार्द्ध की ओर गति करने लगता है, जिससे दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी। दिन बड़े होने से सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक पृथ्वी पर रहता है जिससे फसलें पकती हैं और बारीश के लिए पर्याप्त वाष्पीकरण होता है। इसलिए मकर संक्रांति का धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी माना गया है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Photos on

Recommended Stories