
Mohini Ekadashi Story In Hindi: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस बार मोहिनी एकादशी व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को किया जाएगा और इसके अगले दिन यानी 28 अप्रैल, मंगलवार को इस व्रत का पारण। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है जिसे सुने बिना इसका पूरा फल नहीं मिलता। आगे पढ़ें मोहिनी एकादशी व्रत की रोचक कथा…
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- धर्म ग्रंथों के अनुसार किसी समय भद्रावती नाम के एक नगर में धनपाल नाम का एक वैश्य यानी व्यापारी रहता था। वह बहुत ही धर्मात्मा स्वभाव का था और भगवान विष्णु का परम भक्त था। उस व्यापारी के 5 बेटे थे, जिनमें से सबसे बड़ा बेटा बहुत ही दुष्ट स्वभाव का था। जिसके कारण व्यापारी बहुत परेशान रहता था
- व्यापारी का बेटा वेश्याओं के पास जाता और जुआ आदि खेलता था। धनपाल ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं माना तो एक दिन तंग आकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया। अब धनपाल का वह बेटा जीवन-यापन के लिए वह चोरी करने लगा और लोगों के साथ लूट-पाट भी करता था।
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- एक बार सैनिकों ने उसे चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। राजा ने उसे कारागार में डलवा दिया। बाद में राजा के कहने पर सैनिकों ने उसे नगर के बाहर छोड़ दिया। एक दिन उसे खाने-पीने को कुछ भी नहीं मिलता, जिसके कारण वह भूख-प्यास से तड़पते हुए कौण्डिन्य मुनि के आश्रम में जा पहुंचा।
- कौण्डिन्य मुनि के भीगे हुए कपड़ों की कुछ बूंदे उस वैश्य पुत्र पर पड़ने से उसकी बुद्धि शुद्ध हो गई। उसने ऋषि कौण्डिन्य से अपने पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। तब ऋषि ने उसे वैसाख मास की मोहिनी एकादशी व्रत करने को कहा। समय आने वाल वैश्य पुत्र ने मोहिनी एकादशी का व्रत किया।
- इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए। मृत्यु के बाद उसे विष्णुलोक मिला। इस व्रत की कथा सुनने से 1 हजार गोदान के पुण्य के समान फल मिलता है। जो भी व्यक्ति मोहिनी एकादशी का व्रत करता है, उसे ये कथा जरूर सुननी चाहिए। तभी उसे इस व्रत का पूरा फल मिलता है।
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