
Muharram Kab Se Shuru Hoga: हर धर्म का अपना एक अलग कैलेंडर होता है जैसे हिंदू धर्म में विक्रम संवत की मान्यता है और क्रिश्चियन ग्रेगेरियन कैलेंडर को मान्यता देते हैं वहीं इस्लाम को मानने वाले हिजरी कैलेंडर को मानते हैं। हिजरी कैलेंडर में भी अन्य कैलेंडर की तरह 12 महीने होते हैं। इसके पहले महीने का नाम मुहर्रम है। इस्लाम में इस महीने का विशेष महत्व है। इस महीने के शुरूआती 10 दिनों में मुस्लिम संप्रदाय के लोग मातम मनाते हैं और दसवें दिन ताजिए निकाले जाते हैं। आगे जानिए मुहर्रम से जुड़ी खास बातें..
मुहर्रम शुरू होने की तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस्लामिक विद्वानों की अनुसार, इस बार 16 जून, मंगलवार की रात अगर चांद दिखाई दिया तो अगले दिन से यानी 17 जून से मुहूर्रम शुरू हो सकता है। इसी के साथ इस्लामिक कैलेंडर का साल 1448 शुरू होगा। मुहर्रम के पहले 10 दिनों तक इस्लाम को मानने वाले खुदा की इबादत करते हैं और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं।
हजरत इमाम हुसैन इस्लाम धर्म के महान व्यक्तित्वों में से एक थे। वे पैगंबर मोहम्मद के नवासे थे। उनका जन्म वर्ष 626 ईस्वी में मदीना में हुआ था। इमाम हुसैन को सत्य, न्याय, साहस और इंसानियत का प्रतीक माना जाता है। हजरत इमाम हुसैन को बादशाह यजीद ने कर्बला के मैदान में कैद कर लिया था। मुहूर्रम के दसवें दिन इमाम हुसैन को परिवार और साथियों सहित कत्ल कर दिया गया। उनकी शहादत की याद में ही मुस्लिम समाज के लोग हर साल मुहर्रम के शुरूआती 10 दिनों में मातम मनाते हैं।
इस बार मुहर्रम का दसवां दिन 26 जून, शुक्रवार को पड़ रहा है। इसलिए इसी दिन हजरत इमाम हुसैन की याद में ताजिए निकाले जाएंगे। इस दिन मुस्लिम समाज की महिलाएं छाती पीटकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं वहीं पुरुष अपना खून बहाकर उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हैं। मुस्लिम समाज के लिए ये दिन बहुत ही खास होता है। इस दिन मुस्लिम समाजजन रोजा भी रखते हैं।
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