Narak Chaturdashi 2026: दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव में नरक चतुर्दशी का खास महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व पर यमराज की पूजा और दीपदान करने की परंपरा है।
Choti Diwali 2026 Kab Hai: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन यमराज की पूजा और दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं इस साल नरक चतुर्दशी की सही तारीख, पूजा और स्नान का मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि।
26
कब है नरक चतुर्दशी 2026?
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा के अनुसार, इस बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर, शनिवार को सुबह 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 8 नवंबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर होगा। ये तिथि दो दिन तक रहने के कारण नरक चतुर्दशी से जुड़ी परंपराएं भी दो दिनों में पूरी की जाएंगी। 7 नवंबर, शनिवार को यमराज की पूजा और दीपदान किया जाएगा, जबकि 8 नवंबर, रविवार को सुबह अभ्यंग स्नान किया जाएगा।
नरक चतुर्दशी पर शाम के समय यमराज की पूजा और दीपदान करने का विधान है। इस बार 7 नवंबर, शनिवार को शाम 5 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक पूजा के लिए शुभ समय रहेगा।
नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करना शुभ माना जाता है। इस दिन शरीर पर तिल के तेल की मालिश करके स्नान करने की परंपरा है। इस बार अभ्यंग स्नान का मुहूर्त 8 नवंबर, रविवार को सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
56
इस विधि से करें नरक चतुर्दशी की पूजा
- 7 नवंबर, शनिवार को शाम के शुभ मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें। - यमराज का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित करें। इस पूजा को यम तर्पण कहा जाता है। - जल चढ़ाते समय नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें- ऊं यमाय नमः, ऊं धर्मराजाय नमः, ऊं मृत्यवे नमः, ऊं अन्तकाय नमः, ऊं वैवस्वताय नमः, ऊं कालाय नमः, ऊं सर्वभूतक्षयाय नमः, ऊं औदुम्बराय नमः, ऊं दध्राय नमः, ऊं नीलाय नमः, ऊं परमेष्ठिने नमः, ऊं वृकोदराय नमः, ऊं चित्राय नमः, ऊं चित्रगुप्ताय नमः। - यमराज की पूजा के बाद उनके नाम से दीपक जलाकर दीपदान करें। परिवार की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करें। - अगले दिन यानी 8 नवंबर को सुबह तिल के तेल से शरीर की मालिश करें और शुभ मुहूर्त में सूर्योदय से पहले स्नान करें। - स्नान करते समय इस मंत्र का जाप करें। सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्। हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥
66
नरक चतुर्दशी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में बलि नाम का एक शक्तिशाली राजा था। वह अपने अधिकार में स्वर्ग लोक भी लेना चाहता था। उसकी इस इच्छा को पूरा होने से रोकने और देवताओं की मदद करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। भगवान वामन राजा बलि के पास पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी। बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद भगवान वामन ने विशाल रूप धारण किया और अपने दो पगों में धरती और आकाश सहित तीनों लोक नाप लिए। तीसरा पग रखने के लिए कोई जगह नहीं बची तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। उनकी दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। कथा के अनुसार, राजा बलि ने भगवान वामन से प्रार्थना की कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तक जो लोग यमराज के नाम से दीपदान करें, उन्हें यम यातना का सामना न करना पड़े। भगवान ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। मान्यता है कि तभी से नरक चतुर्दशी पर यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा शुरू हुई।
Disclaimer इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।