
Abhyanga Snan 2026 Muhurat: नरक चतुर्दशी की सुबह शरीर पर तेल मालिश करने और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। इसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस परंपरा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राक्षस नरकासुर की एक रोचक कथा से भी जुड़ा है। आगे जानिए इस बार अभ्यंग स्नान कब करें, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और इसकी कथा…
पंचांग के अनुसार, इस साल नरक चतुर्दशी का पर्व 7 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 8 नवंबर सुबह 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। चूंकि अभ्यंग स्नान चतुर्दशी की सुबह करने का विधान है इसलिए ये परंपरा 8 नवंबर, रविवार को पूरी की जाएगी। इसके लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करने से नरक जाने का भय नहीं रहता। इस दिन शरीर पर तिल का तेल लगाना और उबटन से स्नान करना शुभ माना जाता है। इसे रूप चौदस भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन अभ्यंग स्नान करने से शरीर की सुंदरता और तेज बढ़ता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस था। उसने अपनी ताकत के घमंड में देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने 16 हजार से अधिक राजकुमारियों को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवता भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर पर हमला किया और उसका वध कर दिया। नरकासुर के अंत से देवताओं और बंदी बनाई गई राजकुमारियों को मुक्ति मिली। मान्यता है कि इसी खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया और भगवान श्रीकृष्ण को ऋषियों ने अभ्यंग स्नान करवाया। तभी से नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की परंपरा चली आ रही है।
- नरक चतुर्दशी सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें। इसके बाद उबटन लगाकर स्नान करें।
- स्नान करते समय ये मंत्र बोलें-
सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्।
हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥
- स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। इस तरह स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
Disclaimer
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