
Devi Siddhidatri Ki Puja Vidhi: इस साल नवमी तिथि 19 और 20 अक्टूबर को पड़ रही है। ऐसे में पूजा की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं। भक्त अपनी इच्छा अनुसार दोनों ही दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा कर सकते हैं। मां सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं और उनकी चार भुजाओं में गदा, चक्र, कमल और शंख हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सिद्धियां प्राप्त होती हैं। देवता भी उनकी आराधना करते हैं। आइए जानते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती और कथा।
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सुबह 09:20 से 10:46 तक
दोपहर 11:48 से 12:34 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 01:37 से 03:03 तक
शाम 04:28 से 05:54 तक
शाम 05:54 से 07:28 तक
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- नवमी की पूजा 19 या 20 अक्टूबर को जिस दिन करें, सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में मां सिद्धिदात्री की तस्वीर किसी साफ जगह पर स्थापित करें।
- देवी को तिलक लगाएं और फूलों की माला चढ़ाएं। इसके बाद रोली, अबीर, गुलाल, अक्षत, हल्दी, मेहंदी और फूल अर्पित करें। मां को नारियल या नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। अंत में मां सिद्धिदात्री की आरती करें। ये हैं देवी सिद्धिदात्री का मंत्र-
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना यदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता, तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि, तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम, हाथ सेवक के सर धरती हो तुम।
तेरी पूजा में न कोई विधि है, तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है।
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो, तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।
तू सब काज उसके कराती हो पूरे, कभी काम उस के रहे न अधूरे।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया, रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया।
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली, जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा, महानंदा मंदिर में है वास तेरा।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता, वंदना है सवाली तू जिसकी दाता...
शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन यानी महानवमी पर बैंगनी (पर्पल) रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बैंगनी रंग आध्यात्मिकता, शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है।
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