Ayudha Puja Kab Kare: शारदीय नवरात्रि का अंतिम दिन यानी नवमी तिथि बहुत ही खास होती है। इस दिन लोग अपने वाहन, औजार व काम में उपयोग आने वाले वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। इसे आयुध पूजा कहते हैं।

Ayudha Puja 2026 Kab Hai: शारदीय नवरात्रि के आखिरी दिन आयुध पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन कई राज्यों में लोग अपने वाहनों, औजारों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की पूजा करते हैं। खासतौर पर कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व पूरे विधि-विधान से मनाया जाता है। मान्यता है कि आयुध पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है और देवी की कृपा बनी रहती है। इस साल शारदीय नवरात्रि 10 दिनों की होने के कारण लोगों के मन में असमंजस है कि आयुध पूजा किस दिन करनी चाहिए। आइए, उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानते हैं कि 2026 में आयुध पूजा की सही तारीख क्या है।

कब करें आयुध पूजा 2026?

आयुध पूजा शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि पर की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस बार नवमी तिथि 19 अक्टूबर, सोमवार की सुबह 10 बजकर 52 मिनिट से 20 अक्टूबर, मंगलवार की दोपहर 12 बजकर 50 मिनिट तक रहेगी। इस वजह से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, और उत्तरी भारत में आयुध पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को और कर्नाटक और केरल में 20 अक्टूबर, मंगलवार को की जाएगी।

19 अक्टूबर 2026 आयुध पूजा के शुभ मुहूर्त

सुबह 09:20 से 10:46 तक
दोपहर 11:48 से 12:34 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 01:37 से 03:03 तक
शाम 04:28 से 05:54 तक
शाम 05:54 से 07:28 तक

20 अक्टूबर 2026 आयुध पूजा के शुभ मुहूर्त

सुबह 09:20 से 10:46 तक
सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 तक
दोपहर 11:48 से 12:34 तक (अभिजीत मुहूर्त)

कैसे करें आयुध पूजा? जानें विधि

- 19 या 20 अक्टूबर, जिस भी दिन आप आयुध पूजा करना चाहते हैं उस दिन जल्दी उठकर स्नान आदि करें और साफ वस्त्र पहन लें।
- अपने आजीविका के साध जैसे वाहन, औजार, उपकरण आदि पर कुमकुम का तिलक लगाएं, फिर चावल चढ़ाएं। इसके बाद फूल अर्पित करें।
- इसके बाद इन पर मौली (पूजा का धागा) बांधें। मिठाई, फल व अन्य चीजों का भोग भी लगाएं। इस तरह पूजा करने के बाद इनकी आरती भी करें।
- इस प्रकार शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन आयुध पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और देवी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

क्यों की जाती है आयुध पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में महिषासुर नाम का एक शक्तिशाली दैत्य था। उसने अपनी ताकत के दम पर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था। इससे परेशान होकर सभी देवताओं ने मां शक्ति का आवाहन किया। जब देवी प्रकट हुईं, तो देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र सौंपे। इन्हीं हथियारों की मदद से मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। इस युद्ध में अस्त्र-शस्त्रों की अहम भूमिका रही। मान्यता है कि इसी घटना से प्रेरित होकर आयुध पूजा की परंपरा शुरू हुई। आज भी इस दिन लोग अपने हथियारों, वाहनों, औजारों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।