
Navratri 2026 Devi Skandmata Puja Vidhi: इस साल शारदीय नवरात्रि की पंचमी तिथि 15 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रही है। इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाएगी। देवी की प्रतिमा में वे भगवान कार्तिकेय को गोद में लिए हुए दिखाई देती हैं। मान्यता है कि मां स्कंदमाता की भक्ति करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, आरती और धार्मिक महत्व से जुड़ी खास बातें...
सुबह 10:46 से दोपहर 12:12 तक
दोपहर 11:49 से 12:35 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:12 से 01:38 तक
दोपहर 01:38 से 03:05 तक
शाम 05:57 से 07:31 तक
- 15 अक्टूबर, गुरुवार को सुबह उठकर स्नान करें। इसके बाद व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। घर में पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करें।
- इसके बाद गौमूत्र छिड़ककर स्थान को पवित्र करें। पूजा स्थल पर लकड़ी का पटिया रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- अब मां स्कंदमाता की तस्वीर स्थापित करें। देवी की तस्वीर पर फूलों की माला चढ़ाएं, कुमकुम से तिलक लगाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- मां को अबीर, गुलाल, सिंदूर, मेहंदी और हल्दी सहित पूजा की अन्य सामग्री एक-एक करके चढ़ाएं। मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करें।
- नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें और इसके बाद मां की आरती करें। ये है मां स्कंदमाता का मंत्र-
या देवी सर्वभूतेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नाम तुम्हारा आता, सब के मन की जानन हारी।
जग जननी सब की महतारी।।
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।
कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा।।
कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरो मैं तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाए तेरे भगत प्यारे।
भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इंद्र आदि देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए, तुम ही खंडा हाथ उठाए
दास को सदा बचाने आई, चमन की आस पुराने आई।
नवरात्रि के पांचवें दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। यह रंग ऊष्मा का प्रतीक है, जो व्यक्ति को दिनभर प्रफुल्लित रखता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर देवी को फूल और दीपक अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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