Navratri Havan Mantra: नवरात्रि नवमी पूजा के लिए मां दुर्गा के 20 हवन मंत्र

Published : Oct 18, 2026, 01:00 PM IST
Navratri Havan Mantra

सार

Navami Havan Mantra: महानवमी पर हवन करते समय मां दुर्गा के इन 20 मंत्रों का जाप करें। जानें नौ देवियों के मंत्र, देवी बीज मंत्र और दुर्गा सप्तशती के श्लोक अर्थ सहित।

नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के पूजा करने के साथ महानवमी पर विशेष हवन करने की परंपरा है। इस दिन भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आरधना करते हैं और हवन के दौरान मंत्रों का जाप करते हुए माता शेरावाली को आहुति अर्पित करते हैं। अगर आप भी शारदीय नवरात्र की नवमी पर हवन करने की सोच रहे हैं लेकिन समझ नहीं आ अग्नि में आहुति देते हुए समय किन मंत्रों का जाप करें तो यहां देखें माता रानी के अलग-अलग स्वरूपों की स्तुति, देवी के बीज मंत्र, और दुर्गा सप्तशती से जुड़े मंत्रों की लिस्ट अर्थ के साथ, जिनका जाप पूजा-परंपरा और श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है।

महानवमी के लिए 20 नवरात्रि हवन मंत्र

मां दुर्गा का हवन मंत्र

  • मंत्र: ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा॥
  • यह मां दुर्गा का प्रचलित मंत्र है। महानवमी पर मां दुर्गा का स्मरण करने और उनकी आराधना के लिए इसका जाप किया जा सकता है।

मां शैलपुत्री का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
  • नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। यह मंत्र देवी के प्रथम स्वरूप को समर्पित है और नवरात्रि की पूजा में उनका स्मरण करने के लिए उपयोग किया जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
  • मां ब्रह्मचारिणी को तप, संयम और साधना का प्रतीक माना जाता है। इस मंत्र के जरिए भक्त देवी के इस स्वरूप का स्मरण कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
  • मां चंद्रघंटा को साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान देवी के इस स्वरूप की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।

मां कूष्मांडा का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
  • मां कूष्मांडा नवरात्रि का चौथा स्वरूप हैं। भक्त इस मंत्र के माध्यम से देवी की वंदना करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

मां स्कंदमाता का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
  • मां स्कंदमाता को मातृत्व और करुणा से जोड़कर देखा जाता है। महानवमी की पूजा में भी उनके स्वरूप का स्मरण किया जा सकता है।

मां कात्यायनी का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
  • मां कात्यायनी देवी दुर्गा के छठे स्वरूप के रूप में पूजी जाती हैं। यह मंत्र उनकी आराधना और स्तुति के लिए प्रचलित है।

मां कालरात्रि का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
  • मां कालरात्रि को नवरात्रि के सातवें दिन पूजा जाता है। उन्हें शक्ति और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। इस मंत्र से भक्त उनके स्वरूप का स्मरण करते हैं।

मां महागौरी का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
  • मां महागौरी नवरात्रि के आठवें दिन पूजी जाती हैं। महानवमी के अवसर पर भी भक्त मां महागौरी सहित देवी के सभी स्वरूपों का स्मरण कर सकते हैं।

मां सिद्धिदात्री का मंत्र

  • मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
  • मां सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन पूजी जाती हैं। महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना करने वाले भक्त इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।

देवी बीज मंत्र

  • मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
  • यह दुर्गा सप्तशती से संबंधित प्रसिद्ध नवार्ण मंत्र है। इसे देवी उपासना में विशेष स्थान प्राप्त है। इसका जाप श्रद्धा के साथ किया जाता है और विधि के लिए अपनी पूजा-परंपरा का पालन करना चाहिए।

मां दुर्गा की स्तुति का मंत्र

  • मंत्र: सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
  • शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
  • यह देवी की प्रसिद्ध स्तुति है। इसमें मां को कल्याण करने वाली, सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली और शरण देने वाली देवी के रूप में नमन किया गया है।

मां दुर्गा को समर्पित मंत्र

  • मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • यह दुर्गा सप्तशती का प्रसिद्ध मंत्र है। इसका भाव है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बार-बार प्रणाम है।

मां दुर्गा के शांति स्वरूप का मंत्र

  • मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • इस मंत्र में देवी को सभी प्राणियों में शांति के रूप में विद्यमान बताया गया है। पूजा के दौरान इसका पाठ करके भक्त शांति और सद्भाव की कामना करते हैं।

मां दुर्गा के बुद्धि स्वरूप का मंत्र

  • मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • इस मंत्र में देवी को बुद्धि के स्वरूप में नमन किया गया है। भक्त इसका पाठ करते हुए विवेक, समझ और सही निर्णय लेने की क्षमता के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

मां दुर्गा के करुणा स्वरूप का मंत्र

  • मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • यह मंत्र देवी के दया स्वरूप की स्तुति करता है। इसके जरिए भक्त जीवन में करुणा, संवेदनशीलता और दूसरों के प्रति सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा ले सकते हैं।

मां दुर्गा के मातृ स्वरूप का मंत्र

  • मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • इस मंत्र में देवी को मातृशक्ति के रूप में नमन किया जाता है। महानवमी पर मां के वात्सल्य और संरक्षण का स्मरण करने के लिए इसका पाठ किया जा सकता है।

मां दुर्गा की रक्षा के लिए प्रार्थना

  • मंत्र: शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
  • सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
  • यह देवी की स्तुति का प्रचलित श्लोक है। इसका भाव है कि मां शरण में आए दुखी और पीड़ित लोगों की रक्षा करने वाली हैं। भक्त इसे प्रार्थना के रूप में पढ़ सकते हैं।

मां दुर्गा की विजय स्तुति

  • मंत्र: जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
  • दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
  • यह दुर्गा सप्तशती में प्रसिद्ध देवी स्तुति है। इसमें मां के अनेक नामों का स्मरण किया गया है। देवी के विभिन्न स्वरूपों को नमन करने के लिए इसका पाठ किया जाता है।

मां दुर्गा से कल्याण की प्रार्थना

  • मंत्र: देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
  • रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
  • यह दुर्गा सप्तशती में मिलने वाली प्रसिद्ध प्रार्थना है। इसमें सौभाग्य, आरोग्य, सुख, विजय और यश की कामना की जाती है। भक्त मां दुर्गा के सामने इसे अपनी प्रार्थना के रूप में पढ़ सकते हैं।

नोट- इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और लोक मान्यताओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य सिर्फ आप तक सूचना पहुंचाना है। किसी भी विशेष नियम या उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या अपने कुल पुरोहित से सलाह जरूर लें।

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