
Kanya Pujan Rules: शारदीय नवरात्रि का समापन कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। हिंदू धर्म में कन्याओं को साक्षात मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है। महाअष्टमी और महानवमी के दिन घरों में नौ कन्याओं और एक बटुक (भैरव) को आदरपूर्वक बुलाकर उन्हें भोजन कराया जाता है। लेकिन कन्या पूजन के दौरान कई लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। सबसे बड़ा सवाल जो अक्सर श्रद्धालुओं के मन में रहता है, वो ये है कि क्या कन्याओं को विदा करते समय उनके पैर छूने चाहिए या नहीं? आइए शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार इस नियम को समझते हैं...
शास्त्रों के अनुसार, कन्याओं के घर में प्रवेश करते समय उनके चरण धोकर आशीर्वाद लेना अनिवार्य है। इसके बाद उन्हें आसन पर बैठाकर आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है। भोजन के बाद दक्षिणा और उपहार देने का विधान है। अक्सर लोग बड़ी गलती ये करते हैं कि जब कन्याएं घर के दरवाजे से बाहर निकल रही होती हैं (विदाई के अंतिम समय में), तब वे दौड़कर या उन्हें बीच में रोककर उनके पैर छूते हैं। वास्तु और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, दरवाजे की चौखट पर या बाहर जाते समय कन्याओं के पैर नहीं छूने चाहिए।
जब कन्याएं अपना भोजन समाप्त कर लें और अपने आसन पर बैठी हों, तभी उन्हें रोली-तिलक लगाकर, चुनरी ओढ़ाकर और दक्षिणा देकर उनके चरण स्पर्श करने चाहिए। आसन पर बैठे हुए आशीर्वाद लेना सबसे उत्तम माना जाता है। चलते हुए या घर से बाहर कदम रखते हुए कन्याओं को पीछे से टोकना या रोकना शुभ नहीं माना जाता है। उन्हें खुशी-खुशी और सम्मान के साथ मुख्य द्वार तक छोड़ कर आएं।
जूठे या गंदे हाथों से विदाई
कई बार लोग रसोई के काम में लगे होने के कारण बिना हाथ धोए ही कन्याओं को दक्षिणा दे देते हैं या पैर छू लेते हैं। हमेशा शुद्ध जल से हाथ धोकर ही कन्याओं का तिलक करें और पैर छुएं।
बच्चों पर क्रोध करना
कन्या पूजन में छोटी बच्चियां शामिल होती हैं, जो स्वभाव से चंचल होती हैं। भोजन करते समय अगर वे कुछ गिरा दें या शोर मचाएं, तो उन पर क्रोध न करें। साक्षात देवी का रूप मानकर उनके साथ अत्यंत प्रेम से पेश आएं।
खाली हाथ विदाई
कन्याओं को कभी भी खाली हाथ विदा नहीं करना चाहिए। भोजन के बाद क्षमता अनुसार दक्षिणा (पैसे), कोई लाल रंग का उपहार जैसे चुनरी, चूड़ियां या खिलौने और फल जरूर दें।
अष्टमी तिथि का कन्या पूजन मुहूर्त
आज रविवार, 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:06 बजे से 10:35 बजे तक अत्यंत शुभ समय है। ध्यान रहे कि अष्टमी तिथि सुबह 10:51 बजे तक ही रहेगी, इसलिए पूजन इसी दौरान संपन्न कर लें।
नवमी तिथि का कन्या पूजन मुहूर्त
नवमी का पूजन 19 अक्टूबर को ही सुबह 11:41 बजे से दोपहर 12:28 बजे के बीच किया जा सकता है। कुछ कुल परंपराओं और पंचांग भेदों के अनुसार, नवमी का कन्या पूजन अगले दिन 20 अक्टूबर को सुबह से लेकर दोपहर 12:50 बजे तक भी किया जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार आप सही दिन चुन सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और लोक मान्यताओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य सिर्फ आप तक सूचना पहुंचाना है। किसी भी विशेष नियम या उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या अपने कुल पुरोहित से सलाह जरूर लें।
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