Shradh Places in India: इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो चुका है जो 10 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान देश के विभिन्न तीर्थों में श्राद्ध, तर्पण आदि के लिए भीड़ उमड़ती है। कुछ तीर्थों से तो रोचक मान्यताएं भी प्रचलित हैं।
10 Famous Tirth for Shradh: हिंदू धर्म में पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है। देशभर में कई ऐसे तीर्थ स्थान हैं, जहां पितरों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने की परंपरा रही है। इनमें से कुछ स्थानों के बारे में ग्रंथों और पुराणों में भी बताय गया है। मान्यता है कि इन तीर्थों पर विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आगे जानिए ऐसे ही 10 प्रमुख तीर्थों के बारे में…
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सबसे बड़ा श्राद्ध तीर्थ है गया
बिहार में स्थित गया पितृ कर्म और पिंडदान के लिए प्रमुख तीर्थ माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान यहां देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और फल्गु नदी के तट पर अपने पितरों के लिए पिंडदान व तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया में पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस स्थान का वर्णन रामायण में भी मिलता है।
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इस तीर्थ की रक्षा करते हैं स्वयं ब्रह्मा
राजस्थान का लोहागर भी श्राद्ध के लिए प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तीर्थ की रक्षा स्वयं ब्रह्माजी करते हैं। यहां पिंडदान के साथ अस्थि विसर्जन की परंपरा भी है। मान्यता है कि लोहागर में श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को इस तीर्थ का प्रधान देवता माना जाता है।
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यहां जन्म-मृत्यु से मिलती है मुक्ति
उत्तर प्रदेश का प्रयागराज भी पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यहां गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। प्रयाग में श्राद्ध कर्म कराने से पितरों को शांति मिलती है। मान्यता है कि यहां विधि-विधान से पितरों का तर्पण करने से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति का पुण्य प्राप्त होता है।
बद्रीनाथ धाम के पास स्थित ब्रह्मकपाल को पितृ श्राद्ध के लिए पवित्र तीर्थ माना जाता है। यहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों की शांति के लिए पिंडदान और अन्य श्राद्ध कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ब्रह्मकपाल में पितरों के लिए किए गए श्राद्ध से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। यहां के बारे में यह भी मान्यता है कि एक बार इस स्थान पर श्राद्ध कर्म करने के बाद पितरों के लिए दोबारा श्राद्ध करने की आवश्यकता नहीं रहती।
गुजरात में द्वारका से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिण्डारक का प्राचीन नाम पिण्डतारक बताया जाता है। यहां एक पवित्र सरोवर है, जिसके किनारे श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। श्रद्धालु पिंडदान के बाद पिंडों को सरोवर में अर्पित करते हैं। इस स्थान पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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प्राचीन तीर्थों में से एक है हरिद्वार
हरिद्वार में गंगा तट पर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। यहां हर की पौड़ी और कुशावर्त घाट जैसे पवित्र स्थान हैं। उत्तराखंड पर्यटन भी हरिद्वार के पंचतीर्थों में कुशावर्त घाट का उल्लेख करता है। ये एक प्राचीन तीर्थ स्थान है, जिससे अनेक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
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यहां हुआ था कार्तिकेय का मुंडन
उज्जैन का सिद्धवट पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां श्राद्ध, पिंड, तर्पण, पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे कर्म किए जाते हैं। इसे पापमोचन तीर्थ भी बताया गया है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का मुंडन संस्कार हुआ था।
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इस तीर्थ को कहते हैं तीर्थराज
पुष्कर का पवित्र सरोवर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार सरोवर 52 घाटों और अनेक मंदिरों से घिरा है और इसे तीर्थराज के रूप में जाना जाता है। इसी पवित्र सरोवर के घाटों पर धार्मिक स्नान और पितरों के निमित्त कर्म किए जाते हैं।
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दक्षिण की काशी है गोकर्ण
गोकर्ण कर्नाटक का प्रमुख धार्मिक तीर्थ है और यहां महाबलेश्वर मंदिर स्थित है। पितृ कर्म के लिए गोकर्ण जाने की परंपरा भी कई हिंदू परिवारों में देखने को मिलती है। कर्नाटक पर्यटन गोकर्ण को महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ और ‘दक्षिण की काशी’ के रूप में वर्णित करता है।
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श्राद्ध के लिए दूर-दूर से यहां आते हैं लोग
कुरुक्षेत्र में सन्निहित सरोवर और पेहोवा पितृ कर्म से जुड़े प्रमुख तीर्थ हैं। सन्निहित सरोवर में श्राद्ध करने की धार्मिक मान्यता है। वहीं पेहोवा को पिंडदान और श्राद्ध कर्म के प्रमुख स्थान के रूप में जाना जाता है। दूर-दूर से लोग यहां अपने मृत परिजनों के पिंडदान के लिए आते हैं।
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