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Pitru Paksha Story: राजा कर्ण से शुरू हुई श्राद्ध की कहानी, 10 तस्वीरों में जानें पूरी कथा

Pitru Paksha 2026: हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में श्राद्ध पक्ष मनाया जाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा जो 10 अक्टूबर तक रहेगा। श्राद्ध पक्ष से जुड़ी अनेक कथाएं और मान्यताएं हमारे समाज में प्रचलित हैं।

3 Min read
Author : Manish Meharele
Published : Sep 25 2026, 04:35 PM IST
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श्राद्ध में क्यों करना चाहिए भोजन का दान?
Image Credit : ChatGPT

श्राद्ध में क्यों करना चाहिए भोजन का दान?

Pitru Paksha Religious Beliefs: पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का खास समय माना जाता है। श्राद्ध से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं पुराणों में मिलती हैं। इनमें राजा कर्ण की कथा सबसे प्रसिद्ध है। आखिर कर्ण के साथ ऐसा क्या हुआ, जिससे श्राद्ध की परंपरा से यह कथा जुड़ गई? 10 तस्वीरों में जानें पूरी कहानी।

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पितृ पक्ष और श्राद्ध की शुरुआत
Image Credit : Meta AI

पितृ पक्ष और श्राद्ध की शुरुआत

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पितरों को समर्पित समय माना गया है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके नाम से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। परिवार अपने पूर्वजों के आशीर्वाद की कामना करता है।

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Pitru Tarpan Mantra: पूर्वजों को जल देते समय पढ़ें ये मंत्र, पितृ पक्ष में ऐसे करें पितरों का स्मरण

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राजा कर्ण की प्रसिद्ध कथा
Image Credit : Meta AI

राजा कर्ण की प्रसिद्ध कथा

पितृ पक्ष की कथा महाभारत के वीर योद्धा कर्ण से जुड़ी है। कर्ण अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध थे। मान्यता है उन्होंने जीवनभर सोना, चांदी, धन और दूसरी मूल्यवान चीजें दान कीं। लेकिन पितरों के लिए अन्न और भोजन का दान उनसे नहीं हो पाया था।

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Pitru Paksha Special: श्राद्ध का खाना सबसे पहले कौए को ही क्यों खिलाते हैं? जानें पितरों से जुड़ी धार्मिक मान्यता

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कर्ण की मृत्यु के बाद
Image Credit : Meta AI

कर्ण की मृत्यु के बाद

कथा के अनुसार- महाभारत युद्ध के बाद जब कर्ण की मृत्यु हुई तो उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। वहां उन्हें सोना और बहुमूल्य वस्तुएं तो मिलीं, लेकिन खाने के लिए अन्न नहीं मिला। कर्ण को इस बात का आश्चर्य हुआ कि ऐसा क्यों हो रहा है, जबकि उन्होंने जीवन में खूब दान किया था।

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कर्ण ने पूछा कारण
Image Credit : Meta AI

कर्ण ने पूछा कारण

कर्ण ने इस बारे में देवताओं से पूछा। तब उन्हें बताया गया कि उन्होंने जीवन में जरूरतमंदों को बहुत धन और सोना दिया, लेकिन अपने पितरों के लिए अन्न का दान नहीं किया। इसलिए उन्हें भोजन का फल प्राप्त नहीं हो रहा था। तब कर्ण को अपने जीवन में हुई इस कमी का पता चला।

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कर्ण को मिला विशेष अवसर
Image Credit : Meta AI

कर्ण को मिला विशेष अवसर

कर्ण ने अपनी समस्या का समाधान पूछा। इसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए धरती पर वापस जाने का मौका दिया गया, ताकि वह अपने पितरों के लिए श्राद्ध और अन्न दान कर सकें। कर्ण ने इस अवसर का उपयोग पूर्वजों के लिए विधि-विधान से कर्म करने में किया।

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पितरों के लिए अन्न का दान
Image Credit : Meta AI

पितरों के लिए अन्न का दान

कर्ण ने अपने पितरों के लिए अन्न, भोजन और जल अर्पित किया। श्राद्ध के दौरान पितरों के नाम से किया गया अन्न दान विशेष माना जाता है। इसके बाद कर्ण को वापस स्वर्ग जाने का अवसर मिला। इसी कथा को पितृ पक्ष से जुड़ी प्रमुख धार्मिक कथाओं में गिना जाता है।

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इसलिए पितृ पक्ष में श्राद्ध
Image Credit : Meta AI

इसलिए पितृ पक्ष में श्राद्ध

कर्ण की कथा यह संदेश देती है कि पितरों के लिए केवल धन या वस्तुओं का दान ही नहीं, बल्कि अन्न और भोजन का अर्पण भी महत्वपूर्ण है। इसी भाव के साथ पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों के नाम से श्राद्ध करते हैं और उन्हें जल, अन्न तथा पिंड अर्पित करते हैं।

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पितरों का आशीर्वाद
Image Credit : Getty

पितरों का आशीर्वाद

हिंदू धर्म में पितरों का स्थान बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। श्राद्ध के दौरान परिवार अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करता है और उनके आशीर्वाद की प्रार्थना करता है। माना जाता है कि पितरों का सम्मान करने से उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है। इसलिए पितृ पक्ष में श्रद्धा और नियम से कर्म किए जाते हैं।

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श्राद्ध में भोजन और तर्पण
Image Credit : AI Image

श्राद्ध में भोजन और तर्पण

पितृ पक्ष में अलग-अलग परिवार अपनी परंपरा और विधि के अनुसार श्राद्ध करते हैं। पितरों के नाम से तर्पण, पिंडदान और भोजन अर्पित किया जाता है।

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कर्ण की कथा का धार्मिक संदेश
Image Credit : Getty

कर्ण की कथा का धार्मिक संदेश

राजा कर्ण से जुड़ी यह कथा पितृ पक्ष की परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। कथा का मुख्य भाव है कि मनुष्य को अपने पितरों को याद करना चाहिए और उनके लिए श्रद्धापूर्वक अन्न, जल तथा भोजन अर्पित करना चाहिए। इसी श्रद्धा के साथ हर साल पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

About the Author

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Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।
पितृ पक्ष
 

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