Pitru Paksha Shradh: पितृ पक्ष में किस दिन करें किसका श्राद्ध? जानें अमावस्या से लेकर मातृ नवमी तक का पूरा कलेंडर

Published : Sep 28, 2026, 10:40 AM IST

Pitru Paksha Tithi: पितृ पक्ष में पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है। आइए 8 तस्वीरों में जानते हैं कि परिवार के किस सदस्य के लिए कौन-सी तिथि खास मानी जाती है।

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सबसे पहले समझें श्राद्ध के यह आसान नियम

पितृ पक्ष में जिस तिथि को पूर्वज का निधन हुआ, आम तौर पर उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है। यानी अगर किसी इंसान की मृत्यु पंचमी तिथि को हुई थी, तो पितृ पक्ष की पंचमी पर उनका श्राद्ध किया जाएगा। यह नियम पिता, दादा, भाई, चाचा या परिवार के किसी भी दिवंगत सदस्य पर लागू होता है।

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नाना-नानी के लिए कौन-सी तिथि?

प्रतिपदा को नाना-नानी के श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है। हालांकि अगर उनकी मृत्यु की तिथि पता है, तो सामान्य रूप से उसी तिथि पर श्राद्ध करने का नियम माना जाता है।

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कुंवारे भाई-बहन या अविवाहित सदस्य

पितृ पक्ष की पंचमी को ‘कुंवारा पंचमी’ भी कहा जाता है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध करने की मान्यता है, जिनकी मृत्यु विवाह से पहले हो गई थी। इसमें परिवार के अविवाहित बेटे या बेटी शामिल हैं।

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मां, दादी और नानी के लिए खास दिन

नवमी को मातृ नवमी कहा जाता है। इस दिन मां, दादी, नानी और परिवार की दिवंगत महिलाओं के लिए विशेष श्राद्ध करने की परंपरा है। ऐसी विवाहित महिलाओं को भी इस दिन याद किया जाता है, जिनका निधन पति के जीवित रहते हुआ था। 2026 में मातृ नवमी 4 अक्टूबर को है।

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संन्यासी या साधु के लिए विशेष तिथि

द्वादशी तिथि संन्यास ले चुके या गृहस्थ जीवन छोड़ चुके लोगों के श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है। इसलिए अगर परिवार में कोई पूर्वज संन्यासी रहा हो, तो उसकी श्राद्ध तिथि तय करते समय इस परंपरा को ध्यान में रखा जाता है। 2026 में द्वादशी 7 अक्टूबर को है।

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कम उम्र में निधन हुए बच्चों के लिए

त्रयोदशी को कम उम्र में निधन हुए बच्चों के श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में परिवार बच्चे को याद करते हुए इस दिन श्राद्ध और तर्पण करता है। 2026 में त्रयोदशी 8 अक्टूबर को है।

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अकाल या दुर्घटना में मृत्यु वालों के लिए

चतुर्दशी को अकाल या असामान्य मृत्यु वाले लोगों के श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है। इसमें दुर्घटना, हिंसा या अन्य कारणों से अचानक हुई मृत्यु को शामिल किया जाता है। 2026 में चतुर्दशी 9 अक्टूबर को है।

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जब पूर्वज की तिथि ही याद न हो

अगर किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि पता नहीं है या तय दिन श्राद्ध नहीं हो पाया, तो सर्वपितृ अमावस्या को उनके लिए श्राद्ध किया जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम और प्रमुख दिन माना जाता है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को है।

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फैमली कलेंडर से जानें किस दिन किसका श्राद्ध होता है...
  • मृत्यु की तिथि पता है- उसी तिथि पर श्राद्ध
  • अविवाहित सदस्य- पंचमी की विशेष परंपरा
  • मां/दादी/नानी और दिवंगत विवाहित महिलाएं- मातृ नवमी
  • संन्यासी- द्वादशी
  • कम उम्र में दिवंगत बच्चे- त्रयोदशी की विशेष परंपरा
  • अकाल/असामान्य मृत्यु- चतुर्दशी
  • मृत्यु की तिथि पता नहीं- सर्वपितृ अमावस्या

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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