
Pradosh Vrat September 2026: हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सबसे पहले प्रदोष व्रत चंद्रदेव ने किया था। इस बार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 2 दिन रहेगी, जिसके चलते ये व्रत कब करें, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट से जानिए प्रदोष व्रत की सही डेट,पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की डिटेल…
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 08 सितंबर, मंगलवार की दोपहर 02 बजकर 43 मिनिट से शुरू होगी जो 09 सितंबर, बुधवार की दोपहर 12 बजकर 31 मिनिट तक रहेगी। प्रदोष व्रत में महादेव की पूजा शाम को की जाती है। त्रयोदशी तिथि में संध्या काल 8 सितंबर, मंगलवार को रहेगा, इसलिए इसी दिन प्रदोष व्रत किया जाएगा। मंगलवार को प्रदोष व्रत होने से ये मंगल प्रदोष कहलाएगा।
ये भी पढ़ें-
Krishna Ji Ki Chhathi 2026: 9 या 10 सितंबर, कब है कान्हाजी की छठी? जानें पूजा विधि मुहूर्त और भोग की डिटेल
पंचांग के अनुसार 8 सितंबर, मंगलवार को प्रदोष काल में पूजा का शुभ समय शाम 6 बजकर 35 मिनिट से रात 8 बजकर 52 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 2 घंटे 18 मिनिट का समय मिलेगा। इस दिन पुष्य नक्षत्र सहित और भी कईं शुभ योग रहेंगे।
ये भी पढ़ें-
Hartalika Teej 2026 Date: 13 या 14 सितंबर, कब करें हरतालिका तीज व्रत? जानें पूजा के मुहूर्त
- मंगलवार सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर मंगल प्रदोष व्रत का संकल्प लें।
- पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करें। इस दौरान झूठ बोलने, किसी को परेशान करने या कोई गलत काम करने से बचें। किसी का दिल न दुखाएं और मन को शांत रखें।
- बताए गए शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की सभी तैयारियां पूरी कर लें। पूजा वाली जगह की अच्छी तरह साफ-सफाई करके उसे पवित्र करें।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर पूजा स्थान पर शिवलिंग स्थापित करें। सबसे पहले शिवलिंग का जल से अभिषेक करें और इसके बाद गाय के दूध से अभिषेक करें।
- अभिषेक के बाद शिवलिंग पर एक-एक करके बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, भस्म, चंदन और फूल आदि अर्पित करें।
- भगवान शिव की पूजा करते समय मन ही मन ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद महादेव को अपनी श्रद्धा और इच्छा के अनुसार भोग लगाएं।
- आखिर में परिवार के साथ मिलकर भगवान शिव की आरती करें और सुख-शांति की प्रार्थना करें। इस व्रत को करने जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत, त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।