
Hanuman Ji Aarti Lyrics In Hindi: हनुमानजी को देवी सीता ने अमरता का वरदान दिया था, इसलिए उन्हें कलयुग का जीवित देवता कहा जाता है। हमारे देश में हनुमानजी के लाखों मंदिर हैं, जहां प्रत्येक मंगलवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है। हर व्यक्ति अलग-अलग तरीके से हनुमानजी की कृपा पाने का प्रयास करता है। विधि-विधान से आरती करने पर भी हनुमानजी बहुत खुश होते हैं। आगे जानें कैसे करें हनुमानजी की आरती और इससे होने वाले 5 फायदे…
- सबसे पहले हनुमानजी की मूर्ति या चित्र के चरणों में 4 बार, नाभि से 2 बार, चेहरे से 1 बार और 7 बार पूरी मूर्ति पर घुमाएं।
- इस तरह 14 बार आरती की थाली घूमाने के दौरान घंटी और ताली सुमधुर धुन में बजाएं। आरती गाते हुए सूर-लय का ध्यान रखें।
- दीपक से आरती के बाद कर्पूर आरती भी जरूर करें। आरती पूरी होने के बाद साफ जल आरती पर हल्का सा छिड़क लें। सबसे पहले हनुमानजी और बाद में अन्य लोगों को आरती दें।
1. जिस घर में हनुमानजी की आरती होती है वहां कोई निगेटिव एनर्जी नहीं होती।
2. हनुमानजी की आरती करने से मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
3. हनुमानजी की पूजा करने वाला तामसिक चीजों से दूर रहता है।
4. हनुमानजी की आरती रोज करने से बुरे दिन टल जाते हैं
5. अगर जीवन पर कोई संकट आए तो वह भी हनुमानजी की कृपा से दूर हो जाते हैं।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
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