Akhurath Chaturthi 2025: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी कब, 7 या 8 दिसंबर? जानें मुहूर्त-मंत्र सहित पूरी विधि

Published : Dec 06, 2025, 02:32 PM IST

Akhurath Chaturthi 2025: पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस बार ये पर्व दिसंबर 2025 में किया जाएगा। इसकी सही डेट को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बन रही है। जानें इस व्रत का महत्व, सही डेट सहित पूरी जानकारी। 

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अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 डेट

धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। हिंदू महीनों के अनुसार हर संकष्टी चतुर्थी का एक खास नाम भी होता है। इसी क्रम में पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस चतुर्थी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथो में बताया गया है। इस बार अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत को लेकर पंचांगों में अलग-अलग डेट बताई जा रही है। आगे जानिए दिसंबर 2025 में कब करें अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत…


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कब है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025?

पंचांग के अनुसार, पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 07 दिसंबर, रविवार की शाम 06 बजकर 24 मिनिट से शुरू होगी जो 08 दिसंबर, सोमवार की शाम 04 बजकर 03 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 7 दिसंबर को होगा, इसलिए इसी दिन अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। पंचांग भेद होने के कारण कुछ स्थानों पर 8 दिसंबर, सोमवार को भी ये व्रत किया जाएगा।

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अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 चंद्रोदय समय

पंचांग के अनुसार 7 दिसंबर, रविवार को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का चन्द्रोदय रात 07 बजकर 55 मिनिट पर होगा। इसके पहले आप भगवान श्रीगणेश की पूजा कर लें और चंद्रोदय होने पर चंद्रमा की पूजा कर अपना व्रत पूर्ण करें।

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इस विधि से करें अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत-पूजा

- 7 दिसंबर, रविवार की सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान आदि करें। इसके बाद हाथ में जल-चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें जैसे- किसी की बुराई न करें, किसी से झूठ न बोलें। एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- चंद्रोदय से पहले घर में किसी स्थान की अच्छे से सफाई करें। यहां पर एक पटिए पर लाल कपड़ा बिछाकर श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- श्रीगणेश की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शु्द्ध घी का एक दीपक भी पास में जलाएं।
- दूर्वा, अबीर, गुलाल, चावल, जनेऊ, पान, वस्त्र रोली आदि चीजें एक-एक करके भगवान श्रीगणेश को चढ़ाते रहें।
- भगवान श्रीगणेश की पूजा करते ऊं गं गणेशाय नम: मंत्र का जाप भी मन ही मन में करते रहें। इससे और शुभ फल मिलेंगे।
- इसके बाद भगवान श्रीगणेश को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। ये भोग घर पर बनाए तो अच्छा रहेगा।
- भोग के बाद श्रीगणेश की आरती करें। चंद्रोदय होने पर जल से अर्ध्य दें और फूल, चावल चढ़ाकर पूजा करें।
- इस तरह अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण करने के बाद भोजन करें। इससे आपकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

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भगवान श्रीगणेश की आरती लिरिक्स हिंदी में

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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