Chaitra Navratri 2025 Day 4: चतुर्थ-पंचमी तिथि का संयोग 2 अप्रैल को, करें कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा, जानें मंत्र, मुहूर्त और विधि

Published : Apr 01, 2025, 08:04 PM IST
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सार

Chaitra Navratri 2025 Day 4: चैत्र नवरात्रि 2025 में चतुर्थी और पंचमी का संयोग एक ही दिन बन रहा है, जो 2 अप्रैल, बुधवार को है। इस दिन चतुर्थी तिथि की देवी कूष्मांडा और पंचमी तिथि की देवी स्कंदमाता दोनों की ही पूजा की जाएगी। 

Chaitra Navratri 2025 Day 4: तिथि क्षय होने के कारण ही इस बार चैत्र नवरात्रि 9 दिनों की न होकर 8 दिनों की रहेगी। 2 अप्रैल, बुधवार को चतुर्थी और पंचमी तिथि का संयोग बन रहा है। यानी इस दिन चतुर्थी तिथि के देवी कूष्मांडा और पंचमी तिथि की देवी स्कंदमाता की पूजा 2 अप्रैल, बुधवार को ही की जाएगी। इस दिन आयुष्मान और सर्वार्थसिद्धि जैसे कईं शुभ योग भी बनेंगे, जिसके चलते इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आगे जानिए 2 अप्रैल, बुधवार को कैसे करें देवी कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा और आरती, साथ ही इस दिन के शुभ मुहूर्त…
 

2 अप्रैल, बुधवार के शुभ मुहूर्त

- सुबह 07:54 से 09:26 तक
- सुबह 10:58 से दोपहर 12:30 तक
- दोपहर 03:34 से 05:06 तक
- शाम 05:06 से 06:38 तक

इस विधि से करें देवी कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा

- 2 अप्रैल, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। इसके बाद एक ही बाजोट यानी पटिए के ऊपर देवी कूष्मांडा और स्कंदमाता की तस्वीर स्थापित करें।
- दोनों देवियों के चित्र पर कुंकुम से तिलक करें। फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। दोनों देवियों को चावल, सिंदूर, फूल आदि चीजें अर्पित करें।
- मां कूष्मांडा की पूजा करते समय ये मंत्र बोलें-
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

- देवी स्कंदमाता की पूजा ये मंत्र बोलकर करें-
या देवी सर्वभूतेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

- पूजा के बाद दोनों देवियों की आरती करें और प्रसाद भक्तों में बांट दें। इस तरह देवी कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा से हर तरह की परेशानी दूर हो सकती है।

मां कूष्मांडा की आरती

कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुंचती हो मां अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

स्कंदमाता की आरती

नाम तुम्हारा आता, सब के मन की जानन हारी।
जग जननी सब की महतारी।।
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।
कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा।।
कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरो मैं तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाए तेरे भगत प्यारे।
भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इंद्र आदि देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए, तुम ही खंडा हाथ उठाए
दास को सदा बचाने आई, चमन की आस पुराने आई।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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