
Chaitra Navratri 2025 Day 7: इन दिनों चैत्र नवरात्रि का पर्व चल रहा है। 4 अप्रैल, शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी कालरात्रि का रूप बहुत विकराल है, जिसे देखकर राक्षस भी कांपने लगते हैं। इनके हाथों में शस्त्र हैं और इनका वाहन गधा है। देवी कालरात्रि की पूजा करने से हर संकट से मुक्ति मिलती है। जानिए कैसे करें देवी कालरात्रि की पूजा, आरती सहित पूरी डिटेल…
- सुबह 07:52 से 09:24 तक
- दोपहर 12:05 से 12:54 तक (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 12:29 से 02:02 तक
- शाम 05:07 से 06:39 तक
- 4 अप्रैल, शुक्रवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल-चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। घर में किसी साफ स्थान पर एक बाजोट के ऊपर देवी कालरात्रि की तस्वीर या चित्र स्थापित करें।
- सरसों के तेल से देवी के सामने दीपक लगाएं, कुमकुम से तिलक करें और फूलों की माला भी पहनाएं। इसके बाद चावल, अबीर, गुलाल आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें। देवी को गुड़ का भोग लगाएं।
- नीचे लिखे मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें-
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
कालरात्रि जय-जय-महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतार॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खडग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें। महाकाली माँ जिसे बचाबे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥
Disclaimer
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