
Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि में हर दिन देवी के एक अलग रूप की पूजा करने का विधान है। इसी क्रम में नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर देवी महागौरी की पूजा की जाती है। इस बार चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 5 अप्रैल, शनिवार को है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, मां महागौरी का रंग अत्यंत गौरा है इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। इनका वाहन सफेद बैल है। इनका स्वभाव शांत और सौम्य है। इनकी 4 भुजाएं हैं, जिनमें से एक में त्रिशूल, दूसरी में डमरु है, तीसरी भुजा अभय मुद्रा में और चौथी वर मुद्रा में है। आगे जानिए देवी महागौरी की पूजा विधि, मंत्र, कथा व आरती…
- सुबह 07:51 से 09:24 तक
- दोपहर 12:04 से 12:54 तक (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 12:29 से 02:02 तक
- दोपहर 03:34 से 05:07 तक
- 5 अप्रैल, शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। इसके बाद ऊपर बताए गए किसी शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें।
- घर में किसी साफ स्थान पर देवी महागौरी की तस्वीर या मूर्ति एक लकड़ी के बाजोट (पटिए) के ऊपर साफ स्थान पर स्थापित करें।
- सबसे पहले देवी के चित्र पर कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- इसके बाद अन्य चीजें जैसे अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी, चावल, सुपारी, चुनरी, चूड़ी आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें।
- देवी को नारियल या उससे बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का जाप करें और आरती करें-
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरी वहां निवासा॥
चंद्रकली ओर ममता अंबे। जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती सत हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥
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