
Devuthani Ekadashi Aarti In Hindi: साल की 24 में कार्तिक मास के शु्क्ल पक्ष की एकादशी बहुत ही खास होती है, इसे देवउठनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि 4 महीने पाताल में शयन करने के बाद भगवान विष्णु इसी एकादशी पर नींद से जागते हैं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा-आरती कर उन्हें नींद से जगाया जाता है। पूजा के दौरान विशेष मंत्र बोले जाते हैं जिसे सुनकर भगवान विष्णु नींद से जागकर सृष्टि का भार पुन: संभालते हैं। पूजा के बाद आरती भी की जाती है। आगे जानें देवउठनी एकादशी पर कैसे करें भगवान विष्णु की आरती…
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Devuthani Ekadashi 2025: कैसे जगाएं भगवान विष्णु को? जानें पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त
- धर्म ग्रंथों के अनुसार किसी भी देवी या देवता की पूजा बिना आरती के पूरी नहीं होती। भगवान के चित्र या प्रतिमा के सामने से आरती कुल 14 बार घुमानी चाहिए।
- सबसे पहले 4 बार चरणों से, 2 बार नाभि से, 1 बार चेहरे पर से और 7 बार पूरे शरीर से। इस तरह 14 आरती घूमने के बाद आगे की प्रक्रिया करनी चाहिए।
- शास्त्रों में आरती की यही विधि बताई गई है। इस प्रकार विधि-विधान से भगवान की आरती करने से उनकी कृपा हमारे ऊपर हमेशा बनी रहती है।
ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ऊं जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ऊं जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ऊं जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ऊं जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ऊं जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ऊं जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ऊं जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ऊं जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ऊं जय...॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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