Govardhan Puja 2025: कब करें गोवर्धन पूजा, 21 या 22 अक्टूबर? जानें पूजा विधि और मुहूर्त

Published : Oct 21, 2025, 08:47 AM IST
Govardhan Puja 2025

सार

Govardhan Puja 2025: हर साल दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन अन्नकूट और सुहाग पड़वा का पर्व भी मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों में इन व्रत-उत्सवों का विशेष महत्व बताया गया है।

Govardhan Puja 2025 Kab Hai: हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। वैसे तो ये पर्व पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है लेकिन इसकी सबसे ज्यादा रौनक गोकुल, मथुरा और वृंदावन आदि क्षेत्रों में देखी जाती है। क्योंकि यहीं पर गोवर्धन पर्वत स्थित है। इस पर्व में महिलाएं घर के बाहर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर इनसकी पूजा करती हैं। इस बार गोवर्धन पूजा की डेट को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बन रही है। आगे जानें साल 2025 में कब करें गोवर्धन पूजा…

ये भी पढ़ें-
क्या है प्रेमानंद महाराज का असली नाम, कहां हुआ जन्म? 10 अनसुनी बातें

क्या है गोवर्धन पूजा 2025 की सही डेट?

वैसे तो गोवर्धन पूजा का पर्व दिवाली के अगले दिन मनाते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा क्योंकि कार्तिक अमावस्या 2 दिन रहेगी। दीपावली 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी, इसके अगले दिन यानी 21 अक्टूबर, मंगलवार को अमावस्या तिथि शाम 05 बजकर 54 मिनिट तक रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार गोवर्धन पूजा सुबह करने का विधान है, जो स्थिति 22 अक्टूबर, बुधवार को बन रही है। इसलिए 22 अक्टूबर को ही ये पर्व मनाया जाएगा।

ये भी पढ़ें-
शुक्रवार के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना जल्द ही गरीब हो जाएंगे आप

गोवर्धन पूजा 2025 शुभ मुहूर्त

सुबह 06:26 से 08:42 तक
दोपहर 03:29 से शाम 05:44 तक

कैसे करें गोवर्धन पूजा? जानें विधि

- जो भी महिलाएं गोवर्धन पूजा करना चाहति हैं वे 22 अक्टूबर, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और गोवर्धन पूजा का संकल्प लें।
- दिन भर गलत विचार मन में लाएं, सात्विक भोजन करें। किसी की बुराई या चुगली न करें। मन में ही भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें।
- ऊपर बताए गए मुहूर्त में घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। पास ही भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र रखें।
- गोवर्धन पर्वत पर फूलों की माला पहनाएं। कुमकुम, चावल आदि चढ़ाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। भोग लगाएं और अंत में आरती करें।
- इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी करें। ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा देकर विदा करें। इससे आपको शुभ फल मिलेंगे।

गोवर्धन पूजा की कथा

- श्रीमद्भागवत के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण बालक अवस्था में थे, तब गोकुल के लोग अच्छी बारिश की कामना से इंद्रदेव की पूजा करते थे। ये बात जानकर श्रीकृष्ण ने सभी से कहा कि ‘बारिश करना तो इंद्र का काम है। हमारा गायों का भरण-पोषण तो गोवर्धन पर्वत करता है, इसलिए हमें इसी की पूजा करनी चाहिए।’
- तब सभी लोगों ने श्रीकृष्ण की बात मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। ये देख देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने गोकुल पर मूसलाधार बारिश करनी शुरू कर दी। श्रीकृष्ण ने सभी को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया, जिससे सभी ग्रामवासी सुरक्षित हो गए।
- जब 7 दिन तक श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर रखा तो ये देखकर इंद्र समझ गए कि श्रीकृष्ण कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। तब देवराज इंद्र ने आकर श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। तभी ये गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है जो आज भी जारी है।

Disclaimer 
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

PREV

पूजा व्रत कथा: Read everthing about Puja Vrat Katha, Puja Vrat Muhurat, tyohar and puja vidhi for Hindu festivals at Asianet news hindi

Read more Articles on

Recommended Stories

Sakat Chauth Bhajan Lyrics: सकट चौथ पर सुने ये 5 भजन, खो जाएं गणेशा की भक्ति में
Chauth Mata Aarti Lyrics In Hindi: सकट चतुर्थी पर करें चौथ माता की आरती, यहां पढ़ें लिरिक्स