Indira Ekadashi Vrat Katha: कब है इंदिरा एकादशी 2025, इस दिन कौन-सी कथा सुनें?

Published : Sep 16, 2025, 09:08 AM IST
indira ekadashi Vrat katha

सार

Indira Ekadashi Vrat Katha:आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते हैं। इस व्रत का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था। बिना कथा सुने इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए इसकी कथा जरूर सुनें।

Ekadashi Kab Hai: इस बार श्राद्ध पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत 17 सितंबर, बुधवार को किया जाएगा। श्राद्ध पक्ष में आने के कारण इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं कि जो भी व्यक्ति इस एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करता है, उसके पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से इस व्रत की कथा के बारे में कहा है कि ‘इंदिरा एकादशी की कथा सुनने से भी मनुष्य को अनन्त फल की प्राप्ति होती है।’ आगे पढ़ें इंदिरा एकादशी व्रत की कथा…

ये भी पढ़ें-
Indira Ekadashi 2025: 17 सितंबर को करें इंदिरा एकादशी व्रत, जानें मंत्र, मुहूर्त सहित हर बात

इंदिरा एकादशी व्रत की कथा

सतयुग में इंद्रसेन नाम के एक पराक्रमी राजा थे। वे महिष्मती नाम की एक नगरी पर राज्य करते थे। उनके राज्य में सभी सुखी और संपन्न थे। एक दिन जब राजा इंद्रसेन अपनी सभा में बैठे थे, तभी वहां देवऋषि नारद आए। राजा ने देवऋषि नारद का उचित आदर-सत्कार किया।

ये भी पढ़ें-
इंदिरा एकादशी और पितृ श्राद्ध का अनोखा संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

जब राजा इंद्रसेन ने देवऋषि नारद से आने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा ‘पिछले दिनों में जब मैं यमलोक गया तो वहां मैंने आपके पिताजी को बैठे देखा। तुम्हारे पिता महान दानी और धर्मात्मा थे लेकिन एकादशी व्रत भंग होने के कारण वे यमलोक में निवास कर रहे हैं। उन्होंने तुम्हारे लिए एक संदेश भी भेजा है।’
देवऋषि नारद बोले, तुम्हारे पिताजी ने कहा ‘मेरे किसी पूर्व जन्म के पाप के कारण मुझे यमलोक में रहना पड़ रहा है, यदि मेरा पुत्र इंद्रसेन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करे और उसका फल मुझे दे तो मेरी मुक्ति हो जाएगी और मैं स्वर्गलोक में वास करुंगा।’
देवऋषि नारद के मुख से पिता का संदेश सुन राजा इंद्रसेन को बहुत दुख हुआ और उन्होंने आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने का निश्चय किया साथ ही नारदजी से उस व्रत की पूरी विधि भी पूछी। नारदजी ने राजा इंद्रसेन को पूरी विधि बताई और वहां से चले गए।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी आने पर राजा इंद्रसेन ने अपने पूरे परिवार सहित इंदिरा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से राजा इंद्रसेन के पिता यमलोक से निकलकर स्वर्ग को चले गये। इस व्रत का कथा को सुनने से भी व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

 

PREV

पूजा व्रत कथा: Read everthing about Puja Vrat Katha, Puja Vrat Muhurat, tyohar and puja vidhi for Hindu festivals at Asianet news hindi

Read more Articles on

Recommended Stories

Maha Shivratri 2026 Kab Hai: 15 या 16 फरवरी महाशिवरात्रि कब है? यहां दूर करें कंफ्यूजन जानें सही डेट
Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी व्रत कब? जानें पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त