
June 2025 Mai Kab Hai Vinayak Chaturthi: धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी व्रत किया जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। इस बार ये व्रत आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि के दौरान किया जाएगा। गुप्त नवरात्रि की चतुर्थी तिथि 2 दिन रहेगी, इसलिए इस व्रत की सही डेट को लेकर लोगों के मन में कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है। जानें कब करें आषाढ़ मास का विनायक चतुर्थी व्रत? साथ ही पूजा विधि और शुभ मुहूर्त…
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 जून, शनिवार की सुबह 9 बजकर 54 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 29 जून, रविवार की सुबह 9 बजकर 54 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का व्रत चंद्रोदय को ध्यान में रखकर किया जाता है और चतुर्थी तिथि का चंद्रमा 28 जून को उदय होगा, इसलिए इसी दिन विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाएगा
28 जून, शनिवार को शाम 08 बजकर 26 मिनिट पर होगा। इसके पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा कर लें और चंद्रोदय पर चंद्रमा की पूजा करें। चंद्रोदय होने का समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
- 28 जून, शनिवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें यानी किसी पर क्रोध न करें, झूठ न बोलें। मन ही मन में श्रीगणेशाय नम: मंत्र का जाप करते रहें।
- शाम को चंद्रोदय से पहले विधि-विधान से भगवान की पूजा करें। श्रीगणेश की प्रतिमा को एक साथ स्थान पर स्थापित कर कुमकुम से तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं। साथ ही गाय के शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- इसके बाद दूर्वा, अबीर, गुलाल, रोली, जनेऊ, पूजा की सुपारी आदि चीजें भी एक-एक करके चढ़ाएं। पूजा करते ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप करते रहें। श्रीगणेश को हल्दी की गांठ भी जरूर अर्पित करें।
- अपनी इच्छा के अनुसार फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं और आरती करें। चंद्रमा उदय होने पर इसकी भी पूजा करें, जल में फूल डालकर अर्घ्य दें और सुख-समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करें।
- इस तरह अपना व्रत पूर्ण करने के बाद पहले प्रसाद खाएं और फिर स्वयं भोजन करें। इच्छा अनुसार जरूरतमंदों को दान भी करें। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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