Karwa Chauth: शादी से पहले करवा चौथ का व्रत रखने से क्या सच में मिलता है मनचाहा जीवनसाथी?

Published : Oct 04, 2025, 06:47 PM IST
Karwa Chauth

सार

Karwa Chauth Before Marriage: करवा चौथ का व्रत आमतौर पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अविवाहित लड़कियां भी इसे रख सकती हैं? आइए इस बारे में विस्तार से जानें-

Karwa Chauth Before Marriage: करवा चौथ का ज़िक्र होते ही मन में विवाहित महिलाओं की छवि उभर आती है जो पूरे दिन उपवास रखकर अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। हिंदू धर्म में इस व्रत को बहुत ही खास और कठिन माना जाता है, क्योंकि इस दौरान न तो पानी ग्रहण किया जाता है और न ही भोजन। हालांकि, बदलते समय के साथ, न केवल विवाहित महिलाएं, बल्कि कई अविवाहित लड़कियां भी अपनी पसंद का जीवनसाथी पाने के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। अब सवाल उठता है कि क्या शादी से पहले करवा चौथ का व्रत रखना सही है? आइए जानें इसका धार्मिक महत्व और नियम।

2025 में करवा चौथ कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को रात 10:54 बजे शुरू होकर 10 अक्टूबर को शाम 7:38 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, करवा चौथ व्रत शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा। इस दिन रात लगभग 8:47 बजे चंद्रमा के दर्शन होने की संभावना है।

क्या अविवाहित लड़कियां करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल विवाहित महिलाएं ही नहीं, बल्कि अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। हालांकि, विवाह से पहले व्रत रखने वाली महिलाओं को कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ऐसा कहा जाता है कि करवा चौथ का व्रत रखने से भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है और युवतियों को अच्छा जीवनसाथी मिलता है। इसके अलावा, यदि कोई युवक चाहे तो अपनी पत्नी के लिए भी यह व्रत रख सकता है।

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कुंवारी लड़कियां कैसे करती हैं करवा चौथ पूजा

कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ का व्रत रखने की विधि थोड़ी अलग होती है। जिनकी सास नहीं हैं, वे एक दिन पहले ही अपनी सरगी खरीद सकती हैं। व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाकर पूरे दिन निर्जला व्रत रखें। स्नान के बाद नए, रंग-बिरंगे वस्त्र धारण करें और श्रृंगार करें। व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान गणेश, शिव, कार्तिकेय और करवा देवी की पूजा करें। शाम को चंद्रमा निकलने से पहले भगवान की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में छलनी से चंद्रमा की बजाय तारों को देखकर आरती करें और अपने हाथों से जल पीकर व्रत खोलें।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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