Pradosh Vrat July 2025: सावन से पहले मंगल प्रदोष का शुभ योग, जानें डेट, मंत्र, मुहूर्त सहित पूरी पूजा विधि

Published : Jul 06, 2025, 04:06 PM IST
mangal pradosh 2025

सार

Pradosh Vrat July 2025: भगवान शिव की कृपा पाने के लिए हर महीने में 2 बार प्रदोष व्रत किया जाता है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में सावन से पहले मंगल प्रदोष का शुभ योग बन रहा है। इस दिन कईं शुभ योग भी बन रहे हैं। 

Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव का प्रिय मास सावन 11 जुलाई से शुरू होने वाला है लेकिन इसके पहले ही शिव पूजा का एक और शुभ बन रहा है। ये शुभ योग है मंगल प्रदोष, जो 8 जुलाई को है। मंगलवार को प्रदोष व्रत होने से ये मंगल प्रदोष कहलाएगा, वहीं विजया पार्वती व्रत भी इसी दिन किया जाएगा। इस तरह एक ही दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का शुभ संयोग बन रहा है। आगे जानें मंगल प्रदोष की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…

8 जुलाई मंगल प्रदोष शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम को करने की परंपरा है। 8 जुलाई, मगंलवार को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:20 से रात 09:21 तक रहेगा।

इस विधि से करें मंगल प्रदोष व्रत (Mangal Pradosh Puja Vidhi)

8 जुलाई, मंगलवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। शाम को ऊपर बताए शुभ मुहूर्त में शिवजी की पूजा शुरू करें। शिवलिंग के अभिषेक पहले शुद्ध जल से फिर से दूध से और फिर पुन: शुद्ध जल से करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। एक-एक करके शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा रोली, अबीर आदि चीजें चढ़ाएं। भोग लगाएं और आरती करें। पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप भी करें। प्रदोष व्रत करने से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।

भगवान शिव की आरती (Lord shiva Aarti)

जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे स्वामी पंचांनन राजे
हंसानन गरुड़ासन हंसानन गरुड़ासन
वृषवाहन साजे ओम जय शिव ओंकारा
दो भुज चारु चतुर्भूज दश भुज ते सोहें स्वामी दश भुज ते सोहें
तीनों रूप निरखता तीनों रूप निरखता
त्रिभुवन जन मोहें ओम जय शिव ओंकारा
अक्षमाला बनमाला मुंडमालाधारी स्वामी मुंडमालाधारी
त्रिपुरारी धनसाली चंदन मृदमग चंदा
करमालाधारी ओम जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगें स्वामी बाघाम्बर अंगें
सनकादिक ब्रह्मादिक ब्रह्मादिक सनकादिक
भूतादिक संगें ओम जय शिव ओंकारा
करम श्रेष्ठ कमड़ंलू चक्र त्रिशूल धरता स्वामी चक्र त्रिशूल धरता
जगकर्ता जगहर्ता जगकर्ता जगहर्ता
जगपालनकर्ता ओम जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका
प्रणवाक्षर के मध्यत प्रणवाक्षर के मध्य
ये तीनों एका ओम जय शिव ओंकारा
त्रिगुण स्वामीजी की आरती जो कोई नर गावें स्वामी जो कोई जन गावें
कहत शिवानंद स्वामी कहत शिवानंद स्वामी
मनवांछित फल पावें ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभू जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभू हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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