December 2023 Shivratri: 11 दिसंबर को सोमवार और मासिक शिवरात्रि का शुभ संयोग, जानें पूजा विधि, मंत्र, आरती सहित पूरी डिटेल

Published : Dec 10, 2023, 03:47 PM IST
sawan somvar ki katha

सार

December 2023 Shivratri: धर्म ग्रंथों के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का पर्व हर महीने मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने का विधान है। इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। 

Masik Shivratri December 2023: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महीने में कई व्रत किए जाते हैं, इन्हीं में से एक है मासिक शिवरात्रि। इसे शिव चतुर्दशी भी कहते हैं। ये व्रत हिंदू पंचांग के प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर किया जाता है। इस बार ये व्रत 11 दिसंबर, सोमवार को किया जाएगा। इस दिन किए गए व्रत-पूजन से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए मासिक शिवरात्रि व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व अन्य खास बातें…

मासिक शिवरात्रि पर कौन-से शुभ योग बनेंगे? (Masik Shivratri December 2023)
पंचांग के अनुसार, अगहन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 दिसंबर, सोमवार को पूरे दिन रहेगी, इसलिए ये पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। सोमवार को मासिक शिवरात्रि का संयोग बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि ये तिथि और वार दोनों ही महादेव को अतिप्रिय है। 11 दिसंबर, सोमवार को मित्र, मानस, सर्वार्थसिद्धि और सुकर्मा नाम के शुभ योग रहेंगे।

इस विधि से करें शिव चतुर्दशी की पूजा विधि (Masik Shivratri Puja Vidhi December 2023)
- 11 दिसंबर, सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- दिन भर निराहार यानी बिना कुछ खाए-पिए रहें। ऐसा संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
- इस व्रत में रात के चारों पहर में पूजा का विधान है। रात्रि के पहले प्रहर में शिवजी की पूजा शुरू करें।
- सबसे पहले शुद्ध घी का दीपक जलाएं। शिवलिंग का पंचामृत और फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- अबीर, गुलाल, रोली, बिल्व पत्र, धतूरा, भांग आदि चीजें चढ़ाएं। अन्य तीन प्रहर में भी शिवजी की पूजा करें।
- चौथे प्रहर की पूजा के बाद आरती करें भोग लगाएं। इस व्रत से भक्तों की हर इच्छा पूरी हो सकती हैं।

भगवान शिव की आरती (Shiv ji Ki aarti)
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

 

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