Purnima-Amavasya 2026 Dates: साल 2026 में कब-कब है पूर्णिमा और अमावस्या?

Published : Nov 10, 2025, 06:43 PM IST
purnima and amavasya 2026 dates

सार

Purnima and Amavasya 2026 Dates: वर्ष 2026 में कुल छह पूर्णिमा और 12 अमावस्याएं होंगी। इन दिनों का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ, व्रत और दान पुण्य करना शुभ माना जाता है, जबकि अमावस्या…

Purnima 2026 List Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की दो महत्वपूर्ण तिथियां विशेष मानी जाती हैं - पूर्णिमा और अमावस्या। पूर्णिमा प्रकाश का प्रतीक है, जबकि अमावस्या आत्मनिरीक्षण और नकारात्मकता के निवारण का दिन माना जाता है। यहां 2026 की सभी पूर्णिमा और अमावस्या तिथियों के बारे में जानें। साथ ही इसका क्या महत्व और पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? ये भी जानें...

2026 में पूर्णिमा कब है?

2 जनवरी: पौष पूर्णिमा

1 फरवरी: माघ पूर्णिमा

1 मार्च: फाल्गुन पूर्णिमा

2 अप्रैल: चैत्र पूर्णिमा

1 मई (शुक्रवार) - वैशाख पूर्णिमा

31 मई (रविवार) - ज्येष्ठ पूर्णिमा

29 जून (सोमवार) - ज्येष्ठ पूर्णिमा

29 जुलाई (बुधवार) - आषाढ़ पूर्णिमा

28 अगस्त (शुक्रवार) - श्रावण पूर्णिमा

8 अक्टूबर (गुरुवार) - शरद पूर्णिमा

2026 में अमावस्या कब है?

18 जनवरी (रविवार)- माघ अमावस्या

17 फरवरी (मंगलवार)- फाल्गुन अमावस्या

19 मार्च (गुरुवार)- चैत्र अमावस्या

17 अप्रैल (शुक्रवार)- वैशाख अमावस्या

16 मई (शनिवार)- ज्येष्ठ अमावस्या

15 जून (सोमवार) - ज्येष्ठ अमावस्या (अधिक मास)

14 जुलाई (मंगलवार)- आषाढ़ अमावस्या

12 अगस्त (बुधवार)- श्रावण अमावस्या

11 सितंबर (शुक्रवार)- भाद्रपद अमावस्या

10 अक्टूबर (शनिवार) - आश्विन अमावस्या (श्राद्ध अमावस्या)

9 नवंबर (सोमवार)- कार्तिक अमावस्या

8 दिसंबर (मंगलवार)- मार्गशीर्ष अमावस्या

पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का दिन अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में होता है, जो समृद्धि, सकारात्मकता और मानसिक शांति का प्रतीक है। पूर्णिमा के दिन व्रत, स्नान, दान और पूजा करने से पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पूर्णिमा के दिन क्या करें

  • स्नान और पूजा- प्रातः सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी, तालाब या घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें। इससे तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं।
  • उपवास- पूर्णिमा का व्रत रखने से पापों का नाश होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पूरे दिन फलाहार या सात्विक भोजन करें।
  • चंद्र देव की पूजा करें- रात्रि में चंद्रमा को जल अर्पित करें और चावल, दूध और चीनी से उनकी पूजा करें। इससे मानसिक शांति मिलती है और धन में वृद्धि होती है।
  • दान और सेवा करें- इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे पितृदोष और ग्रहों का प्रभाव भी दूर होता है।
  • ध्यान और मंत्र जाप करें- पूर्णिमा के दिन हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्रनाम और गायत्री मंत्र का ध्यान, जप या पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।

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पूर्णिमा के दिन क्या न करें

  • क्रोध और विवाद से बचें- चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इस दिन क्रोध करना, झगड़ा करना या अपशब्द बोलना नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
  • मांस-मदिरा का त्याग करें- इस दिन सात्विक आचरण करें, क्योंकि अशुद्ध भोजन शुभ प्रभावों को कम करता है।
  • बाल या नाखून न काटें- धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बाल या नाखून काटना अशुभ माना जाता है।
  • रात में नकारात्मक विचारों से बचें- चंद्रमा की ऊर्जा का मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए नकारात्मक या उदास विचारों से बचें।
  • किसी का अपमान या धोखा न करें- पूर्णिमा के दिन गलत काम करने का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए सच्चाई और सद्भावना बनाए रखें।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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