
Famous Ganesh Mantra: भगवान श्रीगणेश की पूजा में जो मंत्र सबसे ज्यादा बोला जाता है वो है ‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ’। इस मंत्र को बोले बिना श्रीगणेश की पूजा पूरी नहीं होती। इस मंत्र का वर्णन शिव महापुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इस मंत्र में भगवान श्रीगणेश के विशेष स्वरूप की आराधना की गई है, जिसकी पूजा से हर संकट टल सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा से जानिए इस मंत्र का महत्व, अर्थ और फायदे सहित हर बात…
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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ- जिनकी सूंड घुमावदार है, जिनका शरीर विशाल है, जो करोड़ सूर्यों के समान तेजस्वी हैं, वही भगवान मेरे सभी काम बिना बाधा के पूरे करने की कृपा करें।
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अनेक धर्म ग्रंथों में इस मंत्र का महत्व बताया गया है। जब भी श्रीगणेश की पूजा की जाती है तो ये मंत्र जरूर बोला जाता है। यह मंत्र में भगवान गणेश जी से प्रार्थना की गई है, की गोल सूंड वाले, बड़ी आकृति वाले, करोड़ सूर्य के समान तेज वाले देवता हमारे सारे कार्यों को बिना किसी रूकावट से संपन्न कराएं। इसका महत्व बताते हुए नारद जी कहते हैं की ‘जो कोई सुबह उठकर इस मंत्र का एक बार भी पाठ कर लेता हैं तो उसके दिन भर के सभी काम सफलता पूर्वक हो जाते हैं।’
1. किसी भी काम को शुरू करने से पहले या किसी यात्रा पर जाने से पहले इस मंत्र को पढ़ने से ही वो काम सफलता पूर्वक हो जाता है।
2. इस मंत्र के जाप से सभी ग्रह दोष दूर हो जाते हैं। अगर घर में वास्तु दोष हो तो भी इस मंत्र के प्रभाव से उसका निगेटिविटी खत्म हो जाती है।
3. इंटरव्यू में सफलता के लिए या कोर्ट-कचहरी में चल रहे मामलों में विजय के लिए इस मंत्र का 108 बार पाठ करना चाहिए।
4. इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से करना शुभ होता है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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